Tuesday, Aug 25

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‘कीचड़ में गिरेंगे तो कैसे पढ़ेंगे?’ 500 मीटर सड़क के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे 100 बच्चे

Mahoba: महोबा जिले के सिद्धनडेरा गांव में करीब 500 मीटर की कच्ची सड़क स्कूली बच्चों की पढ़ाई में बड़ी बाधा बन गई है। ग्रामीणों के मुताबिक आजादी के बाद से सड़क पक्की नहीं हुई। बारिश के दिनों में यहां पानी और कीचड़ भर जाता है, जिससे प्राथमिक और जूनियर स्कूल जाने वाले बच्चों को काफी परेशानी होती है। इसी समस्या को लेकर करीब 100 बच्चे अपने अभिभावकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और परिसर में नारेबाजी कर सड़क बनवाने की मांग की। बच्चों ने बताया कि बारिश में रास्ता इतना खराब हो जाता है कि स्कूल पहुंचना मुश्किल होता है। कई बच्चे फिसलकर गिर भी चुके हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

‘बेटियां कीचड़ में गिरेंगी तो पढ़ेंगी कैसे?’

छात्राओं आकांक्षा और चांदनी ने कहा कि सरकार बेटियों को पढ़ाने की बात करती है, लेकिन उनके गांव में स्कूल तक पहुंचने के लिए सुरक्षित रास्ता तक नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि अगर बेटियां कीचड़ में गिरेंगी तो पढ़ेंगी कैसे? सिद्धनडेरा गांव इलाहीपुरा ग्योडी क्षेत्र में आता है। यहां के प्राथमिक और जूनियर स्कूलों के बच्चों को रोज इसी कच्चे रास्ते से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से इस समस्या का सामना कर रहे हैं।

अधिकारियों ने गांव पहुंचकर देखा हाल

बच्चे जिलाधिकारी के सामने अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन उस समय डीएम मौजूद नहीं थे। इसके बाद एडीएम इंद्रानंदन सिंह ने बच्चों और अभिभावकों की शिकायत सुनी और एसडीएम सदर शिवध्यान पांडे तथा बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल मिश्रा को मौके पर भेजा। बीएसए राहुल मिश्रा बच्चों और ग्रामीणों के साथ सिद्धनडेरा पहुंचे। बच्चों की समस्या सुनने के बाद उन्होंने एक मासूम को गोद में उठाया और गांव के लिए रवाना हुए। गांव पहुंचकर उन्होंने जलभराव और कीचड़ वाले रास्ते का निरीक्षण किया तथा ग्रामीणों से जानकारी ली। बीएसए ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को सौंपने और सड़क निर्माण की कार्रवाई प्राथमिकता से शुरू कराने का भरोसा दिया। एडीएम ने भी त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

बच्चों को सड़क बनने की उम्मीद

ग्रामीणों के लिए 500 मीटर की यह सड़क सिर्फ रास्ता नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई से जुड़ा मुद्दा है। बच्चों ने कहा कि सड़क बन गई तो वे मुख्यमंत्री को दिल से धन्यवाद देंगे। अधिकारियों के आश्वासन के बाद अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। उन्हें उम्मीद है कि आजादी के बाद से कच्ची पड़ी यह सड़क जल्द पक्की होगी और बारिश में बच्चों को कीचड़-पानी से होकर स्कूल नहीं जाना पड़ेगा।

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