Meenakshi Temple : तमिलनाडु के मदुरै स्थित प्रसिद्ध अरुलमिगु मीनाक्षी सुंदरेश्वरर मंदिर की करोड़ों रुपये की जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में बड़ा कदम उठाया गया है। मंदिर प्रशासन की शिकायत पर मदुरै सिटी सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने 19 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों में पूर्व राजस्व अधिकारी, सब-रजिस्ट्रार और कई निजी लोग शामिल हैं। मामला करीब 60 करोड़ रुपये मूल्य की मंदिर संपत्ति से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस ने इस मामले में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं के तहत जांच शुरू कर दी है।
मंदिर प्रशासन का आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में कथित बदलाव कर मंदिर की जमीन को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कराने की कोशिश की गई। शिकायत के अनुसार, मदुरै के चोक्कीकुलम इलाके में स्थित यह जमीन वर्ष 1930 में पुडुकोट्टई राजघराने की महारानी टी.एम. दुरैरानी द्वारा वसीयत के माध्यम से मंदिर को दान की गई थी। इस संपत्ति से होने वाली आय का इस्तेमाल धार्मिक कार्यों, धर्मार्थ गतिविधियों और छात्रवृत्ति जैसे कार्यों के लिए किया जाना था।
मंदिर प्रशासन का दावा है कि वर्ष 2016 में राजस्व रिकॉर्ड से मंदिर का नाम हटाकर कुछ निजी लोगों के नाम पर पट्टा जारी कर दिया गया। इसके बाद कथित तौर पर जमीन से जुड़े कई लेन-देन भी किए गए। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जमीन विवाद अदालत और राजस्व विभाग में लंबित होने के बावजूद वर्ष 2021 में पावर ऑफ अटॉर्नी और मॉर्गेज से जुड़े दस्तावेजों का पंजीकरण कराया गया।
पुलिस के अनुसार, अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि दस्तावेजों के पंजीकरण के दौरान किन नियमों का उल्लंघन हुआ और इसमें किस-किस व्यक्ति की भूमिका रही। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत केस दर्ज किया गया है।
एफआईआर में कई पूर्व अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनमें पूर्व ग्राम प्रशासनिक अधिकारी (VAO) अरासन, पूर्व तहसीलदार अंबालागन, मुरप्पानाडु के तत्कालीन सब-रजिस्ट्रार अनंथारामन और वडामदुरै के सब-रजिस्ट्रार प्रशांत संथाना करुप्पन समेत कई निजी व्यक्ति शामिल हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में बदलाव कैसे हुए और दस्तावेजों को मंजूरी देने की प्रक्रिया में क्या अनियमितताएं हुईं।
क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि सामाजिक संगठन अरप्पोर इयक्कम ने सबसे पहले इस कथित गड़बड़ी को सामने रखा था। इसके बाद हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग ने मामले पर कार्रवाई शुरू की।
तमिलनाडु के एचआर एंड सीई मंत्री एस. रमेश ने कहा है कि मंदिरों की संपत्तियों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मीनाक्षी मंदिर की जमीन से जुड़े इस मामले ने मंदिर संपत्तियों की सुरक्षा और रिकॉर्ड व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल क्राइम ब्रांच जांच कर रही है और आने वाले समय में जांच के आधार पर इस मामले में और कार्रवाई होने की संभावना है।
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