India U19 Team
India U19 Team: भारतीय क्रिकेट टीम ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि उसके लिए खेल से बढ़कर राष्ट्रीय सम्मान और सिद्धांत हैं। भारतीय अंडर-19 टीम ने एशिया कप के पुरस्कार समारोह में ऐसा कदम उठाया, जिसने क्रिकेट जगत के साथ-साथ सियासी गलियारों में भी हलचल मचा दी।
दुबई में खेले गए अंडर-19 एशिया कप फाइनल में पाकिस्तान ने भारत को बड़े अंतर से हराकर खिताब अपने नाम किया। जीत के बाद आयोजित पुरस्कार समारोह में एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख मोहसिन नकवी मंच पर मौजूद थे। उन्होंने विजेता पाकिस्तानी टीम को मेडल पहनाए, लेकिन जब बारी भारतीय टीम की आई, तो नज़ारा बिल्कुल अलग था।
उपविजेता टीम को मेडल दिए जाने के समय भारतीय खिलाड़ी उस मंच पर नहीं पहुंचे, जहां मोहसिन नकवी खड़े थे। इसके बजाय, टीम इंडिया ने मैदान के किनारे मौजूद आईसीसी अधिकारी मुबाशशीर उस्मानी से अपने मेडल प्राप्त किए। ना हाथ मिलाया गया, ना मंच साझा किया गया, पूरा संदेश बेहद साफ और सधा हुआ था।
इस फैसले के पीछे वजह सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि सियासी और नैतिक रुख है। मोहसिन नकवी केवल पीसीबी अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं। भारतीय टीम का मानना है कि सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों के मद्देनज़र ऐसे अधिकारियों के साथ औपचारिक मेल-मिलाप करना शहीदों और उनके परिवारों की भावनाओं के खिलाफ होगा।
भारतीय अंडर-19 टीम का यह कदम कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। इसकी नींव पहले ही सीनियर टीम रख चुकी है। सितंबर 2025 में हुए सीनियर एशिया कप के दौरान भारतीय टीम ने ‘नो-हैंडशेक पॉलिसी’ अपनाई थी। उस समय भारतीय टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के पीड़ितों के सम्मान में पाकिस्तानी कप्तान से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया था।
तनाव उस वक्त चरम पर पहुंच गया था, जब एशिया कप फाइनल के बाद भारतीय टीम ने ट्रॉफी मोहसिन नकवी से लेने से इनकार कर दिया था। बताया जाता है कि नाराज नकवी ट्रॉफी लेकर मंच से चले गए थे, जो अब तक भारतीय टीम को नहीं सौंपी गई है।
अंडर-19 टीम का यह कदम दर्शाता है कि भारत की क्रिकेट इकाइयों में अब एक स्पष्ट और एकजुट नीति दिखाई दे रही है। खिलाड़ी मानते हैं कि खेल अपनी जगह है, लेकिन राष्ट्रहित और मानवीय संवेदनाएं उससे ऊपर हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि भारत सिर्फ बल्ले और गेंद से नहीं, बल्कि अपने फैसलों से भी संदेश देता है। अब सवाल यह है, क्या आने वाले टूर्नामेंटों में भी यह रुख जारी रहेगा? क्रिकेट की राजनीति फिलहाल मैदान से बाहर ज़्यादा गर्म दिख रही है।
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