अध्यात्म

Nagchandreshwar Mandir: साल में सिर्फ 24 घंटे खुलते हैं कपाट, जानें क्या है मंदिर का रहस्य

Nagchandreshwar Mandir: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर को देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। सावन के पवित्र महीने में यहां भगवान शिव के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी मंदिर की तीसरी मंजिल पर नागचंद्रेश्वर मंदिर स्थित है, जो अपनी अनोखी परंपरा और पौराणिक मान्यताओं के कारण विशेष महत्व रखता है।

साल में सिर्फ एक बार खुलते हैं कपाट

नागचंद्रेश्वर मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसके कपाट सामान्य दिनों में बंद रहते हैं और साल में केवल एक बार 24 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले जाते हैं। यह अवसर नागपंचमी के दिन आता है। इस दौरान भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। मंदिर के कपाट खुलने के दौरान विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

नागराज तक्षक और भगवान शिव से जुड़ी मान्यता

पौराणिक मान्यता के अनुसार, नागराज तक्षक ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अमरता का वरदान दिया। इसके बाद नागराज तक्षक भगवान शिव की शरण में रहने लगे। इसी धार्मिक मान्यता के कारण नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव के साथ नाग की विशेष रूप से पूजा की जाती है। यहां विराजमान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा को भगवान शिव और नागराज तक्षक से जुड़ी इस पौराणिक कथा का प्रतीक माना जाता है।

नागचंद्रेश्वर की होती है त्रिकाल पूजा

महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर विराजमान श्री नागचंद्रेश्वर का स्वरूप बेहद अलौकिक माना जाता है। यहां त्रिकाल पूजा की परंपरा भी बताई जाती है। मंदिर में भगवान शिव और नाग की आराधना का विशेष महत्व है। नागपंचमी के अवसर पर जब मंदिर के कपाट खोले जाते हैं, तब विशेष पूजा के साथ श्रद्धालुओं को भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन का अवसर मिलता है। यही अनोखी परंपरा इस मंदिर को उज्जैन के धार्मिक स्थलों में विशेष स्थान देती है।

क्यों खास है नागचंद्रेश्वर मंदिर

नागचंद्रेश्वर मंदिर की विशेषता केवल इसके साल में एक बार खुलने तक सीमित नहीं है। भगवान शिव और नागराज से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं, महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर इसका स्थित होना और नागपंचमी पर होने वाली विशेष पूजा इसे श्रद्धालुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।

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Lavanya Dayal

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