यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू
UGC Rules Update: देश की राजधानी दिल्ली समेत कई प्रमुख शहरों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू 'इक्विटी रेगुलेशन 2026' के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इसका मुख्य कारण सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में SC, ST और OBC के लिए 'समान अवसर प्रकोष्ठ' का गठन अनिवार्य करना है। नए नियमों के तहत पहली बार अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी जातिगत भेदभाव से संरक्षण प्राप्त समूहों की सूची में शामिल किया गया है, जिस पर जनरल कैटेगरी के छात्रों ने कड़ी आपत्ति जताई है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि OBC को पहले से ही आरक्षण जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, ऐसे में उन्हें भी इस श्रेणी में क्यों रखा गया है।
यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ करणी सेना ने जिला कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रवादी करणी सेना के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने पैदल मार्च निकाला और कलेक्ट्रेट पहुंचकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में कई किसान संगठन और सवर्ण समाज से जुड़े संगठन भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपते हुए यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग की।
वाराणसी में UGC के नए नियमों को लेकर जोरदार विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में छात्र और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। जिला मुख्यालय पर बड़ी संख्या में लोग जुटे और इन नियमों को वापस लेने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह बिल सामान्य वर्ग के लोगों के साथ भेदभाव करता है। विरोध के दौरान लोगों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की।
UGC कानून के खिलाफ संभल में सीनियर केमिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी जुलूस के रूप में नारेबाजी करते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने “UGC कानून रद्द करो” और “काला कानून वापस लो” जैसे नारे लगाए।
कल्याण सिंह सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री रह चुके रविंद्र शुक्ला ने UGC कानून के विरोध में आवाज उठाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस कानून को वापस लेने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि बिल वापस नहीं हुआ तो वह भाजपा से इस्तीफा दे सकते हैं।
दरअसल, यूजीसी की ओर से उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने की नीयत से 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026' को लागू किया गया है। इस नियम के लागू होने के बाद यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में समानता प्रकोष्ठ का गठन किया जाना है। यहां एससी, एसटी समुदाय के साथ-साथ ओबीसी वर्ग के छात्र, शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी भी किसी भी प्रकार के भेदभाव की शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
सवर्ण वर्ग की ओर से उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू किए जा रहे इस नियम को असमानता का नियम करार देना शुरू कर दिया है। इस कानून के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है। सवर्ण वर्गों के संगठन इस पूरे मामले में लगातार विरोध दर्ज करा रहे हैं। बड़े स्तर पर कानून का विरोध हो रहा है। इस बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने इस्तीफा देकर मामले को और भड़का दिया है।
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