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निशिकांत दुबे मानहानि केस: हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद पोस्ट हटाने को तैयार महुआ मोइत्रा

by | Oct 27, 2026 | News Top

Nishikant Dubey Defamation Case: दिल्ली हाईकोर्ट में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की ओर से दायर मानहानि मुकदमे पर सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा और पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग को समन जारी किया गया है। दुबे ने दोनों के खिलाफ माफी, आपत्तिजनक सामग्री पर स्थायी रोक और दो करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पॉडकास्ट में इस्तेमाल किए गए एक शब्द को अपमानजनक बताया। वहीं, महुआ मोइत्रा के वकील ने संबंधित पोस्ट हटाने की बात कही, जबकि गर्ग के वकील ने पॉडकास्ट से आपत्तिजनक शब्द हटवाने के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया।

निशिकांत दुबे ने क्यों दायर किया मानहानि का मुकदमा?

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। दुबे का आरोप है कि गर्ग ने 17 सितंबर को एक पॉडकास्ट या इंटरव्यू में उनके बारे में झूठे और मानहानि करने वाले बयान दिए थे। दुबे के मुताबिक, यह वीडियो यूट्यूब, फेसबुक और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया, जिससे कथित तौर पर आपत्तिजनक बातें अधिक लोगों तक पहुंचीं। इस मामले में दुबे ने 21 सितंबर को गर्ग को कानूनी नोटिस भी भेजा था। नोटिस में कथित आरोपों को वापस लेने, अपनी बात से पीछे हटने और वीडियो हटाने की मांग की गई थी।

कोर्ट ने दोनों को समन जारी कर मांगा जवाब

मंगलवार को जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ के सामने मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने महुआ मोइत्रा और सुभाष चंद्र गर्ग को समन जारी करते हुए जवाब दाखिल करने को कहा। दोनों पक्षों के वकीलों ने जवाब देने के लिए समय मांगा। उनका कहना था कि मुकदमे में मामले की पूरी तस्वीर पेश नहीं की गई है। इस पर अदालत ने सवाल किया कि जब तक जवाब दाखिल नहीं होता, क्या संबंधित पक्ष विवादित सामग्री को आगे फैलाने से खुद को रोक सकते हैं?

पॉडकास्ट में इस्तेमाल शब्द पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान अदालत ने पॉडकास्ट में निशिकांत दुबे के लिए इस्तेमाल किए गए एक शब्द पर कड़ी टिप्पणी की। जस्टिस तुषार राव गेडेला ने गर्ग से कहा कि पॉडकास्ट में कही गई आपत्तिजनक बात को बीप या ब्लॉक कराने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि दुबे और गर्ग दोनों प्रतिष्ठित लोग हैं, लेकिन पॉडकास्ट में इस तरह के तीखे शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए था। न्यायाधीश ने यह भी सवाल किया कि यदि किसी व्यक्ति को इसी तरह संबोधित किया जाए, तो क्या वह इसे हल्के में लेगा? अदालत के मुताबिक, इस्तेमाल किया गया शब्द पूरी तरह अपमानजनक है और किसी को भी इस तरह नहीं पुकारा जाना चाहिए। हालांकि, बाकी मुद्दों पर बहस की जा सकती है।

महुआ मोइत्रा ने पोस्ट हटाने पर जताई सहमति

सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा के वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह एक्स पर किए गए कुछ संबंधित पोस्ट हटाने के लिए तैयार हैं। इनमें निशिकांत दुबे को “फेक डिग्री किस्म का आदमी” कहने वाला पोस्ट भी शामिल है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब दुबे ने कथित मानहानिकारक टिप्पणियों के खिलाफ अदालत से राहत मांगी है। हालांकि, पोस्ट हटाने की बात सामने आने का मतलब यह नहीं है कि मुकदमे का अंतिम फैसला हो गया है।

दो करोड़ रुपये का हर्जाना और स्थायी रोक की मांग

निशिकांत दुबे ने अदालत से मांग की है कि महुआ मोइत्रा और सुभाष चंद्र गर्ग को उनके खिलाफ कथित मानहानिकारक आरोप लगाने से रोकने के लिए स्थायी और अनिवार्य आदेश जारी किया जाए। इसके अलावा उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी और दो करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग भी की है। दुबे का कहना है कि संबंधित बयान और वीडियो उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले हैं। इस मामले में अदालत को दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करना है।

गर्ग के वकील ने आपत्तिजनक शब्द हटवाने का दिया आश्वासन

सुनवाई के दौरान सुभाष चंद्र गर्ग के वकील ने निर्देश लेने के बाद कहा कि वह पॉडकास्ट के होस्ट से बात करेंगे और आपत्तिजनक शब्द को म्यूट कराने का प्रयास करेंगे। इसमें निशिकांत दुबे को “ब्लैकमेलिंग किस्म का आदमी” कहने वाला हिस्सा भी शामिल है। फिलहाल, मामले में अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों और आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के संबंध में दिए गए आश्वासनों के बाद अब आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी।

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