India Foreign Policy
India Foreign Policy: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में बांग्लादेश की यात्रा और भारत की पड़ोस नीति को लेकर अपने विचार साझा किए, जो न केवल गंभीर हैं बल्कि पूरे क्षेत्र की कूटनीति पर सवाल खड़े करते हैं। जयशंकर ने कहा कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्हें यह स्पष्ट संदेश देने का मौका मिला कि भारत अपने पड़ोसियों की मदद करता है, निवेश करता है और साझा करता है।
जयशंकर ने जोर देकर कहा कि “अगर आपका कोई पड़ोसी आपके लिए अच्छा है, या कम से कम नुकसानदायक नहीं है, तो स्वाभाविक रूप से आप उसकी मदद करने की कोशिश करते हैं। एक देश के तौर पर भारत यही करता है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपनी विदेश नीति और पड़ोसियों के साथ व्यवहार में कोई बाहरी निर्देश स्वीकार नहीं करता। “हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, यह कोई न बताए”।
विदेश मंत्री ने उदाहरण देते हुए बताया कि भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान अपने पड़ोसियों की मदद की। उन्होंने कहा कि भारत ने वैक्सीन की पहली खेप कई पड़ोसियों को भेजी, जिससे उनके नागरिकों को जीवन रक्षक टीके मिल सके। खासकर श्रीलंका जैसी अर्थव्यवस्था को भारी आर्थिक संकट में $4 बिलियन के पैकेज के माध्यम से सहायता प्रदान की गई। जयशंकर ने बताया कि ऐसे समय में जब IMF के साथ वार्ता धीमी गति से चल रही थी, भारत ने अपने पड़ोसियों की मदद करने का जिम्मा उठाया।
लेकिन विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के पड़ोस में बुरे पड़ोसी भी हैं। उन्होंने कहा, “अगर कोई देश जानबूझकर आतंकवाद जारी करता है, तो हमें अपने लोगों की सुरक्षा के लिए वह अधिकार है जिसे हमें प्रयोग करना चाहिए। हम अपनी रक्षा के लिए जो भी करना होगा करेंगे, और इसे किस तरह लागू करना है, यह पूरी तरह भारत पर निर्भर करता है।” जयशंकर के इस बयान में भारत की कूटनीति की सख्ती और देश की सुरक्षा को सर्वोपरि रखने का संदेश साफ दिखाई देता है।
भारत की आर्थिक स्थिति और विकास को लेकर भी उन्होंने स्पष्ट दृष्टिकोण साझा किया। जयशंकर ने कहा कि भारत की ग्रोथ आज पूरे क्षेत्र के लिए अवसर है। यदि भारत तेजी से बढ़ता है, तो उसके पड़ोसी देश भी आर्थिक रूप से लाभान्वित होंगे। उन्होंने बांग्लादेश को संकेत दिया कि भारत का यह दृष्टिकोण इस क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देगा। बांग्लादेश में चुनावों की ओर बढ़ते कदमों के बीच, जयशंकर ने उम्मीद जताई कि राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक सहयोग पड़ोसी देशों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
विदेश मंत्री ने यह भी जोड़ते हुए कहा कि भारत का दृष्टिकोण सिर्फ आर्थिक या राजनीतिक मदद तक सीमित नहीं है। “हम पड़ोसियों की सहायता इसलिए करते हैं ताकि क्षेत्र में दोस्ती और स्थिरता बनी रहे। अगर किसी पड़ोसी को मुश्किल का सामना करना पड़ता है, तो भारत सहयोग देने के लिए तैयार रहता है।” उन्होंने यह संदेश भी दिया कि भारत केवल मदद देने तक ही सीमित नहीं रहेगा; यदि किसी पड़ोसी देश की गतिविधियां भारत के लिए खतरा बनती हैं, तो जवाबी कार्रवाई भी होगी।
जयशंकर के इन बयानों में एक स्पष्ट संतुलन और सस्पेंस दिखता है। एक ओर भारत पड़ोसियों की मदद कर रहा है, तो दूसरी ओर अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के प्रति पूरी तरह सख्त है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति न तो कमजोर पड़ सकती है और न ही कोई इसे तय करेगा। कुल मिलाकर, जयशंकर का संदेश साफ है। भारत सहयोगी पड़ोसियों के साथ मजबूती से खड़ा है, बुरे पड़ोसियों के प्रति सख्त, और क्षेत्रीय स्थिरता और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
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