Thursday, Oct 08

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मक्का पैक्ट के तहत यमन में हूती ठिकानों पर पाकिस्तानी जेट्स का हमला, सऊदी में 8,000 सैनिक भी तैनात

Pakistan Fighter Jets Houthi Strikes: द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ यमन में जारी हमलों में पाकिस्तान एयरफोर्स के फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर इसकी जानकारी दी। यह घटनाक्रम सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है, जहां हाल के दिनों में सऊदी क्षेत्र पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज हुए हैं।

सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती

CNN के मुताबिक पाकिस्तानी सैन्यकर्मी पहले से सऊदी अरब में मौजूद हैं। पाकिस्तान की सैन्य मीडिया विंग के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने भी इसकी पुष्टि की, हालांकि उन्होंने संख्या और क्षमताओं की जानकारी गोपनीय बताते हुए साझा नहीं की। अमेरिकी रक्षा विश्लेषक कर्नल डेविड ओ. स्मिथ के अनुमान के अनुसार, सऊदी अरब में करीब 8,000 पाकिस्तानी सैनिक तैनात हैं। इनमें एयरफोर्स और आर्मी एयर डिफेंस के जवान शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल महत्वपूर्ण तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में हो सकता है। हालांकि, उनका मानना है कि पाकिस्तान ईरान के साथ संबंधों के चलते हूतियों के खिलाफ जमीनी लड़ाई में सैनिक भेजने से बचेगा।

क्या है मक्का डिफेंस पैक्ट?

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने अगस्त में मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत किसी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। रियाद में आपात बैठक के बाद इस समझौते को इस सप्ताह सक्रिय किया गया और सऊदी अरब में सैन्य बलों व क्षमताओं की तेजी से तैनाती पर सहमति बनी। एक अन्य पाकिस्तानी अधिकारी के मुताबिक, इस्लामाबाद की भूमिका हूती मिसाइल और ड्रोन खतरे से निपटने तक सीमित रहने की उम्मीद है। पाकिस्तान की सेना ने फाइटर जेट्स के इस्तेमाल पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

ईरान के साथ रिश्तों की परीक्षा

पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब से करीबी सैन्य-आर्थिक संबंध रखते हुए ईरान से टकराव से बचता रहा है। 2015 में पाकिस्तानी संसद ने यमन में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य हस्तक्षेप से दूर रहने का फैसला किया था। अब मक्का पैक्ट और पाकिस्तानी सैन्य तैनाती ने उसे संघर्ष के और करीब ला दिया है। अगर पाकिस्तानी जेट्स की भूमिका की पुष्टि होती है, तो यह सिर्फ सऊदी की रक्षात्मक मदद नहीं बल्कि ईरान समर्थित हूतियों के खिलाफ सीधे क्षेत्रीय संघर्ष में बढ़ती भागीदारी होगी। इससे रियाद के साथ रणनीतिक साझेदारी और तेहरान से टकराव से बचने के बीच इस्लामाबाद के लिए संतुलन की चुनौती बढ़ सकती है।

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