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कल्याण बनर्जी का निलंबन, रिजिजू का बयान और नड्डा का विपक्ष पर वार… संसद में क्या-क्या हुआ

Parliament Monsoon Session Day 3: संसद के मॉनसून सत्र का तीसरा दिन भी लगातार हंगामे और राजनीतिक टकराव के बीच बीता। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जबकि सरकार ने सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की अपील की। शोर-शराबे और नारेबाजी के कारण कई बार कार्यवाही बाधित हुई।

कल्याण बनर्जी के निलंबन पर बढ़ा विवाद

सत्र के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी के निलंबन का मुद्दा प्रमुख चर्चा का विषय रहा। विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया। वहीं सत्ता पक्ष ने सदन की मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

स्पीकर ने की सदन चलाने की अपील

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि संसद जनता के मुद्दों पर चर्चा का सर्वोच्च मंच है। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे व्यवस्थित ढंग से अपनी बात रखें ताकि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके।

किरेन रिजिजू का विपक्ष से अनुरोध

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष से हंगामा छोड़कर चर्चा में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार सभी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए सदन का चलना जरूरी है। उनका कहना था कि लगातार व्यवधान से जनता के हित से जुड़े विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

विपक्षी नेताओं ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती बरती गई और इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।

नड्डा ने विपक्ष पर साधा निशाना

सत्ता पक्ष की ओर से जेपी नड्डा ने विपक्ष के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि लगातार हंगामा करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुकूल नहीं है। उन्होंने विपक्ष से संसद की कार्यवाही में सहयोग करने और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा करने की अपील की।

गतिरोध से प्रभावित हो रही कार्यवाही

लगातार विरोध और नारेबाजी के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। इससे कई महत्वपूर्ण विधायी और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा नहीं हो सकी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बनती, तो आने वाले दिनों में भी सत्र के प्रभावित रहने की संभावना बनी रह सकती है।

मॉनसून सत्र के शुरुआती तीन दिनों में संसद में सहयोग की बजाय टकराव का माहौल देखने को मिला। एक ओर सरकार सदन चलाने और चर्चा कराने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर जवाब मांगते हुए लगातार विरोध दर्ज करा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में गतिरोध समाप्त होता है या संसद की कार्यवाही इसी तरह बाधित रहती है।

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Lavanya Dayal

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