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प्रियंका गांधी को क्यों मिली असम की जिम्मेदारी? क्या है इसके पीछे की सियासी गणित और मायने

असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी ने स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया जिसकी जिम्मेदारी प्रियंका गांधी वाडरा को सौंपी गई है। स्क्रीनिंग कमेटी उम्मीदवार चयन करने की कमेटी होती है जो हर राज्य में हर सीट पर 2-3 जिताऊ उम्मीदवारों के पैनल को तैयार करती है और उसे सेंट्रल इलेक्शन कमेटी यानी CEC में भेजती है फिर CEC उम्मीदवार के नाम को फाइनल करती है।

टिकट बंटवारे में गांधी परिवार की पहली सीधी एंट्री


कांग्रेस ने असम चुनावी आगाज से पहले ही अपनी स्टेट स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया है जिसका अध्यक्ष प्रियंका गांधी को बनाया गया है। दरसल कांग्रेस पार्टी में यह पहली बार हो रहा है कि गांधी परिवार का कोई सदस्य किसी टिकट बटवारे कमेटी का अध्यक्ष बना हो। कांग्रेस पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति में राहुल गांधी और सोनिया गांधी दोनों है लेकिन कभी किसी राज्य में गांधी परिवार ने इससे पहले ना जिम्मेदारी ली है और ना किसी को दी गई है| लेकिन पहले बार प्रियंका गांधी को असम चुनावी उम्मीदवार चयन करने से लेकर टिकट बंटवारे तक की जिम्मेदारी सौंपी गई है उसके पीछे कांग्रेस की बड़ी रणनीति शामिल है। दरसल कांग्रेस के उच्च सूत्रो के मुताबिक यह जिम्मेदारी मौजूदा सूरतेहाल और चुनावी रणनीति के तहत लिया गया है |

दरसल कांग्रेस पार्टी को लगता है की असम को जितना पार्टी के लिए और खास तौर पर गांधी परिवार के लिए बहुत ज़्यादा जरूरी है। असम के मुख्यमंत्री जो की 2014 से पहले कांग्रेस पार्टी और 2014 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए वह लगातार गांधी परिवार से लेकर कांग्रेस पार्टी को घेरते आए है। चुनावी लिहाज से सही टिकटों का बटवारा, जिताऊ उम्मीदवार को उतारना इस तमाम फैसलों को ध्यान में रखते हुए प्रियंका गांधी को असम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

स्लीपर सेल की आशंका, मजबूत चेहरों पर भरोसा


दर्सल राहुल गांधी और कांग्रेस के बड़े नेता और पुराने नेता यह मानते है की पार्टी के भीतर स्लीपर सेल मौजूद है जो है तो कांग्रेस पार्टी में लेकिन आज भी वह बीजेपी या यूं कहे की असम के मुख्यमंत्री को समर्थन और मदद करते है। सूत्रो के मुताबिक असम में चुनावी मैदान में टिकटों का सही बटवारा हो, कोई भी टिकट ग़लत उम्मीदवार को ना दिया जाए| इसलिए पार्टी ने प्रियंका गांधी को स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया है। वही असम में कांग्रेस के भीतर कई ऐसे नेता है जो आज भी हेमंत बिस्वा शर्मा के साथ संपर्क या उनको मदद करते हैं |

उन लोगो के कारण आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान ना हो सही उम्मीदवारो को पार्टी टिकट दे इस तमाम चीजों को देख कर प्रियंका गांधी को यह जिम्मेदारी दी गई है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी प्रियंका गांधी ने असम में कभी सभाए और प्रचार किया था वही पार्टी को लगता है कि हेमंत बिस्वा शर्मा से लड़ने और उनको घेरने के लिए प्रियंका गांधी सही साबित होगी।

हालांकि असम विधानसभा चुनाव में देखना होगा कि कांग्रेस का यह फैसला और रणनीति कितनी काम आती है और वही प्रियंका गांधी किस तरह इस भूमिका को निभा पाती हैं।

-कनिका कटियार, (नई दिल्ली)

Anil

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