केंद्र सरकार ने रबी फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। सरकार के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना और खेती की लागत के मुकाबले बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करना है। MSP के दायरे में गेहूं, जौ, चना, मसूर, रेपसीड-सरसों और कुसुम जैसी प्रमुख रबी फसलें शामिल हैं।
सरकार की ओर से रबी फसलों के MSP में अलग-अलग दर से वृद्धि की गई है। आधिकारिक 2026-27 के आंकड़ों के मुताबिक गेहूं का MSP 160 रुपये, जौ का 170 रुपये, चना का 225 रुपये, मसूर का 300 रुपये, रेपसीड-सरसों का 250 रुपये और कुसुम का 600 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया था।
इससे संबंधित MSP इस प्रकार हैं:
* गेहूं: 2,585 रुपये प्रति क्विंटल
* जौ: 2,150 रुपये प्रति क्विंटल
* चना: 5,875 रुपये प्रति क्विंटल
* मसूर: 7,000 रुपये प्रति क्विंटल
* रेपसीड-सरसों: 6,200 रुपये प्रति क्विंटल
* कुसुम: 6,540 रुपये प्रति क्विंटल
MSP बढ़ाने के पीछे क्या है सरकार का उद्देश्य?
केंद्र सरकार MSP तय करते समय उत्पादन लागत समेत कई आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखती है। सरकार ने 2018-19 के बजट में यह नीति घोषित की थी कि निर्धारित फसलों का MSP उत्पादन लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक रखा जाए, यानी लागत के करीब 1.5 गुना स्तर पर MSP तय करने का लक्ष्य रखा गया।
2026-27 के लिए जारी आंकड़ों में गेहूं पर उत्पादन लागत के मुकाबले 109 प्रतिशत, रेपसीड-सरसों पर 93 प्रतिशत और मसूर पर 89 प्रतिशत का मार्जिन बताया गया है। वहीं चना, जौ और कुसुम पर क्रमशः 59 प्रतिशत, 58 प्रतिशत और 50 प्रतिशत का मार्जिन दर्ज है।
MSP में बढ़ोतरी के जरिए सरकार दाल और तिलहन जैसी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी जोर दे रही है। इसका उद्देश्य किसानों को पारंपरिक अनाज वाली फसलों के अलावा दूसरी फसलों की ओर आकर्षित करना और देश में दालों की उपलब्धता बढ़ाना है। सरकार ने दालों में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय दलहन मिशन जैसी पहल भी शुरू की है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्षों में गेहूं की सरकारी खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। MSP व्यवस्था के तहत सरकारी एजेंसियां किसानों से निर्धारित फसलों की खरीद करती हैं। किसानों के पास अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को MSP पर बेचने या खुले बाजार में बेचने का विकल्प रहता है।
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक रबी की छह प्रमुख फसलों की खरीद और MSP के जरिए किसानों को किए जाने वाले भुगतान में भी समय के साथ वृद्धि हुई है। 2025-26 रबी मार्केटिंग सीजन में इन छह फसलों की कुल खरीद 310 लाख मीट्रिक टन रही और MSP के तहत इनका कुल मूल्य करीब 79,267 करोड़ रुपये बताया गया है।
सरकार का कहना है कि MSP व्यवस्था किसानों को बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच एक न्यूनतम मूल्य का सुरक्षा आधार उपलब्ध कराती है। इसके साथ ही बढ़े हुए MSP से दाल और तिलहन जैसी फसलों की खेती को प्रोत्साहन देने की कोशिश की जा रही है।
केंद्र के अनुसार MSP में बढ़ोतरी का उद्देश्य किसानों को उनकी फसल के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना है। सरकार का कहना है कि MSP और सरकारी खरीद की व्यवस्था के जरिए किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने के साथ कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
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