AAP छोड़ BJP में क्यों गए राघव चड्ढा?
Raghav Chadha New Video: देश की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इस फैसले ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी, बल्कि उनके समर्थकों और आम जनता के बीच भी कई सवाल खड़े कर दिए। अब खुद राघव चड्ढा ने एक वीडियो जारी कर अपने इस बड़े फैसले के पीछे की पूरी कहानी साझा की है।
राघव चड्ढा ने वीडियो में बताया कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें लगातार मैसेज मिल रहे थे कुछ लोग उन्हें बधाई दे रहे थे, तो कई लोग यह जानना चाहते थे कि आखिर उन्होंने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया। इसी का जवाब देने के लिए उन्होंने यह वीडियो जारी किया। राघव ने अपने सफर को याद करते हुए कहा कि राजनीति में आने से पहले वह एक सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट थे और उनके पास शानदार करियर था। लेकिन उन्होंने देश सेवा के उद्देश्य से सब कुछ छोड़कर राजनीति का रास्ता चुना और आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए। उन्होंने दावा किया कि पिछले 15 वर्षों में उन्होंने पूरी निष्ठा और मेहनत से पार्टी को मजबूत बनाने में योगदान दिया।
हालांकि, उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब पार्टी पहले जैसी नहीं रही। उनके अनुसार, पार्टी का मूल चरित्र बदल चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब पार्टी के अंदर स्वतंत्र रूप से काम करने या अपनी बात रखने की आजादी नहीं है। यहां तक कि संसद में बोलने और जनहित के मुद्दे उठाने से भी रोका जाता था। राघव ने कहा कि पार्टी अब कुछ सीमित लोगों के नियंत्रण में आ गई है, जहां निजी हित देश सेवा पर भारी पड़ रहे हैं।
अपने फैसले को लेकर उन्होंने बताया कि पार्टी छोड़ने के बाद उनके सामने तीन रास्ते थे पहला, राजनीति से पूरी तरह दूरी बना लेना; दूसरा, उसी पार्टी में रहकर बदलाव की कोशिश करना; और तीसरा, किसी नई पार्टी के साथ जुड़कर सकारात्मक राजनीति को आगे बढ़ाना। राघव के मुताबिक, उन्होंने गहन विचार के बाद तीसरा विकल्प चुना।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि यह फैसला सिर्फ उनका अकेले का नहीं था। उनके साथ सात अन्य सांसदों ने भी आम आदमी पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि एक या दो लोग गलत हो सकते हैं, लेकिन जब सात लोग एक साथ ऐसा फैसला लें, तो उसके पीछे गंभीर कारण जरूर होते हैं।राघव चड्ढा ने कार्यसंस्कृति को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब किसी संगठन का माहौल ‘टॉक्सिक’ यानी जहरीला हो जाता है, तो वहां काम करना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सही समय पर सही फैसला लेना जरूरी हो जाता है।
अंत में उन्होंने अपने समर्थकों को भरोसा दिलाया कि पार्टी बदलने के बावजूद उनकी प्राथमिकता नहीं बदलेगी। वे पहले की तरह ही जनता के मुद्दों को संसद में मजबूती से उठाते रहेंगे और देशहित में काम करते रहेंगे।
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