Rahul Gandhi Protest Supreme Court: दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए कांग्रेस प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी और उनके घायल होने का आरोप सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज हुई, लेकिन उन्होंने जिम्मेदारी से काम किया। मेहता के मुताबिक, अनुमति नहीं मिलने के कारण प्रदर्शन गैरकानूनी था।
यह सुनवाई 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हुई। इससे दो दिन पहले INDIA गठबंधन के सांसदों को कथित वोट चोरी के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग के साथ जंतर-मंतर जाने से रोका गया था।
प्रदर्शन के अधिकार और प्रतिबंधों पर बहस
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रदर्शन के अधिकार और नागरिकों की आवाजाही व जरूरी सुविधाओं तक पहुंच के बीच संतुलन जरूरी है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने पुलिस की कार्रवाई को उपलब्ध सामग्री के आधार पर जरूरत से ज्यादा बताया। अदालत ने प्रतिबंधों की वैधता जांचने के लिए पुलिस का वास्तविक आदेश मांगा। कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, प्रशांत भूषण और वृंदा ग्रोवर ने मेट्रो स्टेशन बंद करने, ट्रेनें रद्द करने, सीमाओं पर जांच और होटलों को नई बुकिंग रोकने के कथित निर्देशों पर सवाल उठाए। ग्रोवर ने कहा कि CJP के प्रदर्शन की अनुमति के दो आवेदन खारिज किए गए थे, जबकि आयोजकों ने पहले ही घोषणा कर तय स्थान मांगा था। पीठ ने सीमित संख्या में, बिना हथियार प्रदर्शन की संभावना जताई और स्पष्ट किया कि हाईवे जाम नहीं किए जा सकते।
राहुल गांधी पर BJP के आरोप
बुधवार के प्रदर्शन के बाद BJP ने आरोप लगाया कि अशोक रोड पर टकराव के दौरान राहुल गांधी ने एक महिला पुलिस अधिकारी को धक्का देने की कोशिश की और अनुचित तरीके से छुआ। पुलिस उस समय एक महिला प्रदर्शनकारी को हटाने का प्रयास कर रही थी। BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने X पर वीडियो साझा किया, जबकि गौरव भाटिया ने राहुल से माफी की मांग की। कांग्रेस की तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं को बसों के जरिए जंतर-मंतर जाने से रोककर जबरन हटाया और हिरासत में लिया। इससे एक दिन पहले विपक्षी सांसद चुनाव आयुक्तों से मुलाकात की मांग पर आठ घंटे धरने पर बैठे थे।

