Saturday, Aug 22

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CJP के दबाव के बीच ऑडिट में खुलासा, राजस्थान के 611 स्कूलों के पास भवन नहीं

Rajasthan Government Schools Infrastructure: राजस्थान में 611 सरकारी स्कूल बिना अपने भवन के संचालित हो रहे हैं, जिनमें 10 बालिका विद्यालय भी शामिल हैं। राज्य सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। समग्र शिक्षा अभियान के तहत 2025-26 के UDISE आंकड़ों के मुताबिक, जयपुर में 38 ऐसे स्कूल हैं। झालावाड़ के अकलेरा में सबसे ज्यादा 23, खानपुर में 16 और झालरापाटन में 11 स्कूल बिना भवन हैं। फलोदी के बाप में 11 और बांसवाड़ा के छोटीसरवन में 10 स्कूल ऐसे हैं।

यह खुलासा जयपुर के पास बगरू में एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने जा रही CJP टीम पर हमले के कुछ दिन बाद हुआ। टीम स्कूल के कथित तौर पर गौशाला में चलने के दावे की जांच करने पहुंची थी। स्कूल का मूल भवन पिछले साल असुरक्षित घोषित होने के बाद बंद कर दिया गया था और छात्रों को अस्थायी परिसर में भेजा गया।

हजारों स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी

राजस्थान के 64,484 सरकारी स्कूलों के पास अपने भवन हैं, लेकिन इनमें 2,047 में शौचालय और 1,049 में पेयजल सुविधा नहीं है। बांसवाड़ा में 188 स्कूल बिना शौचालय, डूंगरपुर में 124 और उदयपुर में 98 स्कूल हैं। दौसा में सबसे ज्यादा 96 स्कूलों में पेयजल सुविधा नहीं है।

सरकार ने 1,000 करोड़ रुपये किए आवंटित

भाजपा सरकार ने इन कमियों के लिए पिछली अशोक गहलोत सरकार को जिम्मेदार ठहराया और झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद हुए ऑडिट का हवाला दिया। सरकार ने स्कूलों की मरम्मत के लिए 550 करोड़ और नए भवनों के लिए 450 करोड़ रुपये दिए हैं। विभिन्न स्रोतों से हर साल 2,500 करोड़ यानी पांच वर्षों में 12,500 करोड़ रुपये निर्माण, मरम्मत और रखरखाव पर खर्च किए जाएंगे।

विपक्ष ने सरकार की तैयारी पर उठाए सवाल

टीकाराम जूली ने कहा कि ऑडिट में 3,768 स्कूल पूरी तरह जर्जर और असुरक्षित, जबकि 83,783 कक्षाएं इस्तेमाल के लिए असुरक्षित पाई गईं। उन्होंने सरकार पर योजना न होने का आरोप लगाया और कहा कि खराब भवनों के कारण कई स्कूल बंद या स्थानांतरित हुए, जिससे नामांकन प्रभावित हुआ। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से भी स्कूलों की स्थिति पर सरकार को फटकार लगाए जाने का दावा किया। सरकार ने कहा कि स्कूल भवन, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार उसकी प्राथमिकता है।

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