Thursday, Oct 15

होम = Cover Story Top = चेक बाउंस केस के बीच राजपाल यादव को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने कनाडा में शूटिंग के लिए यात्रा की दी अनुमति

चेक बाउंस केस के बीच राजपाल यादव को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने कनाडा में शूटिंग के लिए यात्रा की दी अनुमति

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उन्हें कनाडा में फिल्म की शूटिंग के लिए पासपोर्ट जारी कराने का अनुरोध करने की अनुमति दी है। हालांकि, विदेश यात्रा से पहले अभिनेता को ट्रायल कोर्ट की निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा।

विवाद सुलझाने के लिए मध्यस्थ नियुक्त

सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव और उनके लेनदारों के बीच वित्तीय विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने का निर्देश दिया है। अदालत ने बताया कि कोर्ट रजिस्ट्री में दो करोड़ रुपये जमा कराए जा चुके हैं। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, अभिनेता के वकील विक्रांत यादव ने पेशेवर प्रतिबद्धताओं के चलते विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट जारी करने की मांग की थी।

अदालत ने मामले की जटिलताओं को देखते हुए आपसी सहमति से समाधान की संभावना जताई। दोनों पक्षों को मध्यस्थ से संपर्क कर सुनवाई की तारीख तय करने को कहा गया है। मध्यस्थ उन्हें व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन उपस्थित होने के निर्देश दे सकता है। विदेश से लौटने पर राजपाल को ट्रायल कोर्ट को सूचित करना होगा।

2010 से चल रहा है चेक बाउंस विवाद

मामला 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म 'अता पता लापता' के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से पांच करोड़ रुपये लिए थे। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही। बाद में अभिनेता, उनकी पत्नी और कंपनी ने कथित तौर पर ब्याज सहित रकम लौटाने पर सहमति जताई। वर्ष 2013 में राजपाल ने 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक जारी किए, जो बाउंस हो गए। इसके बाद सात मामले दर्ज हुए।

राजपाल यादव ने बताया 17 करोड़ का नुकसान

इस महीने सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर अभिनेता ने बताया कि फिल्म से उन्हें 17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। लंबी कानूनी लड़ाई से उनका करियर और प्रतिष्ठा भी प्रभावित हुई। सात अक्टूबर की सुनवाई में उन्होंने अपने अनुभवों पर आधारित फिल्म का नाम 'सोलह सावन झेल के' रखने का विचार भी साझा किया। अदालत ने पहले बकाया भुगतान के लिए धन जुटाने को कहा था। दो करोड़ रुपये जमा होने के बाद शेष विवाद मध्यस्थता को भेज दिया गया।

ये भी पढ़े: अब अनजान नंबर से कॉल आने पर भी दिखेगा नाम, 1 नवंबर से सरकार का नया नियम लागू

बंगाल