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ब्रिटेन में चाइल्ड रेप केस में जमानत पर बाहर पूर्व Pak मंत्री ने POK चुनाव जीता

Rushkar Ahmed POK election: ब्रिटेन में चाइल्ड रेप और मानव तस्करी के आरोपों की जांच का सामना कर रहे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के पूर्व मंत्री रुशकर अहमद ने POK विधानसभा चुनाव जीत लिया है। लंदन स्थित अखबार द गार्जियन और द टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 62 वर्षीय अहमद 1990 के दशक में मैनचेस्टर में सक्रिय रहे एक पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग से जुड़े आरोपों के तहत जांच के दायरे में हैं।

पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले अहमद ने 27 जुलाई को हुए पहले चरण के मतदान में LA-4 मीरपुर-IV सीट पर कुल पड़े वोटों में 54% हासिल कर जीत दर्ज की। 2021 में इसी सीट से हारने के बाद यह पांच साल में उनकी पहली चुनावी जीत है।

2006 से 2021 तक कई बार रहे मंत्री

रुशकर अहमद 2006 से 2021 के बीच POK की विभिन्न सरकारों में मंत्री रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने राजस्व, व्यापार, उद्योग, पशुपालन और ऊर्जा विकास संगठन जैसे कई विभागों की जिम्मेदारी संभाली।

POK की 53 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच तीन चरणों में हो रहे हैं। अब तक PML-N 24 सीटें जीतकर बढ़त बनाए हुए है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने इन चुनावों को "तथाकथित स्थानीय चुनाव" बताते हुए "पूरी तरह से दिखावा" करार दिया है। मंत्रालय ने कहा कि POK में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तान की कार्रवाई में अब तक कम से कम 90 लोगों की मौत हो चुकी है।

2024 में ब्रिटेन में हुई थी गिरफ्तारी

द गार्जियन के अनुसार, 18 जुलाई 2024 को ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस (GMP) ने रुशकर अहमद को मैनचेस्टर एयरपोर्ट पर रेप और बाल तस्करी के संदेह में गिरफ्तार किया था।

पुलिस ने उनसे कम से कम दो महिलाओं के आरोपों पर पूछताछ की। महिलाओं का आरोप है कि 1990 के दशक में, जब वे मैनचेस्टर के रशोल्म इलाके के केयर होम में रह रही थीं, तब अहमद ने उनके साथ दुष्कर्म किया और उनकी तस्करी की। यह जांच ऐतिहासिक बाल यौन शोषण और कथित ग्रूमिंग गैंग से जुड़े व्यापक मामले का हिस्सा है।

हालांकि, पुलिस ने अब तक उनके खिलाफ आरोप तय नहीं किए हैं और जांच जारी है। पूछताछ के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। द टाइम्स के अनुसार, इस व्यापक जांच में अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

जमानत पर पेश नहीं हुए, चुनाव प्रचार करते दिखे

रिपोर्टों के मुताबिक, जुलाई में अहमद को मैनचेस्टर पुलिस स्टेशन में जमानत की शर्तों के तहत पेश होना था, लेकिन वह नहीं पहुंचे। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह ब्रिटेन आने के लिए "इतने स्वस्थ नहीं हैं कि यात्रा कर सकें।"

इसी दौरान सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें वह POK के मीरपुर क्षेत्र में चुनाव प्रचार करते दिखाई दिए।

द गार्जियन के अनुसार, अहमद को अगले छह सप्ताह के भीतर दोबारा जमानत पर पेश होना है। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कराने या पाकिस्तान के माध्यम से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान, रोचडेल ग्रूमिंग गैंग के दोषी सरगना शबीर अहमद को वापस लेने से लगातार इनकार कर रहा है, जबकि ब्रिटेन उसे रिहाई के बाद निर्वासित करने की कोशिश कर रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2024 में गिरफ्तारी के दौरान ही जांच अधिकारियों को पहली बार रुशकर अहमद के POK में राजनीतिक पद की जानकारी मिली।

मैनचेस्टर में प्रभावशाली पहचान, नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं

राजनीति में आने से पहले रुशकर अहमद कई वर्षों तक मैनचेस्टर में रहे और वहां गुज्जर पैलेस नाम का रेस्तरां चलाते थे, जो अब बंद बताया जाता है।

द गार्जियन के मुताबिक, कश्मीरी मूल के ब्रिटिश समुदाय में उनकी अच्छी पकड़ रही है और लोग उनसे मिलने ब्रिटेन के अलग-अलग हिस्सों से आते थे। कुछ परिचितों ने उन्हें "जनता का नेता" और "कम भ्रष्ट नेताओं में से एक" बताया, जबकि कई लोगों ने कहा कि वह समुदाय की मदद के लिए जाने जाते थे।

द टाइम्स के अनुसार, ओल्डहैम के लेबर पार्षद मुहम्मद शफीक ने सवाल उठाया कि इतनी गंभीर जांच के बावजूद अहमद को चुनाव लड़ने की अनुमति कैसे मिली। उन्होंने कहा कि इससे पीड़ितों के लिए गलत संदेश जाता है।

वहीं, मैनचेस्टर के ग्रीन पार्टी पार्षद अब्दुल रऊफ मलिक ने कहा कि अदालत में दोष सिद्ध होने तक केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं माना जाना चाहिए।

उधर, POK में PML-N के एक वरिष्ठ नेता ने द गार्जियन को बताया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से अहमद को जानते हैं, लेकिन उन्हें इन आरोपों की जानकारी नहीं थी। उन्होंने केवल इतना सुना था कि 1990 के दशक में अहमद का मैनचेस्टर के कुछ समूहों से संबंध था।

ये भी पढ़े: तहलका के संस्थापक तरुण तेजपाल 13 साल बाद दोषी करार, 2013 रेप केस में HC ने पलटा फैसला

Tanisha Verma

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