Wednesday, Oct 21

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नींद में खर्राटे लेना हो सकता है लिवर के लिए खतरनाक, स्लीप एपनिया से फैटी लिवर का बढ़ सकता है खतरा

Sleep Apnea and Fatty Liver Disease: नींद के दौरान तेज खर्राटे लेना, बार-बार नींद टूटना और दिनभर थकान महसूस होना सामान्य लग सकता है। हालांकि, ये ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) के संकेत भी हो सकते हैं। मेयो क्लिनिक के अनुसार, स्लीप एपनिया एक गंभीर समस्या है, जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती और शुरू होती है। इससे एकाग्रता में कमी, मूड में बदलाव, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

स्लीप एपनिया कैसे प्रभावित करता है लिवर?

मुंबई के M|O|C कैंसर केयर की मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और हीमैटो-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. कस्तूरी बरुआ ने HT Lifestyle को बताया कि OSA में सोते समय ऊपरी श्वसन मार्ग संकरा या बंद हो जाता है। इससे सांस बाधित होती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर घटता है।

बार-बार ऑक्सीजन की कमी होने से सूजन, इंसुलिन संवेदनशीलता और फैट मेटाबॉलिज्म प्रभावित हो सकते हैं, जिनका संबंध फैटी लिवर से है।

फैटी लिवर और स्लीप एपनिया में क्या संबंध है?

लिवर ब्लड शुगर, वसा के मेटाबॉलिज्म और शरीर की ऊर्जा जरूरतों को नियंत्रित करता है। ऑक्सीजन की कमी इन प्रक्रियाओं को प्रभावित कर इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ा सकती है, जिससे लिवर में फैट जमा होने का खतरा रहता है।

इस स्थिति को मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) कहा जाता है। कुछ मरीजों में यह सूजन, फाइब्रोसिस और गंभीर मामलों में सिरोसिस तक बढ़ सकती है।

भारत में कितनी आम है समस्या?

डॉ. बरुआ के अनुसार, भारत में 11,009 वयस्कों पर आधारित आठ अध्ययनों की समीक्षा में 11 प्रतिशत लोगों में OSA पाया गया, जबकि 5 प्रतिशत में मध्यम या गंभीर बीमारी थी।

एक अन्य भारतीय विश्लेषण में वयस्कों के बीच नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) की व्यापकता 38.6 प्रतिशत आंकी गई।

लक्षण और बचाव के उपाय

तेज खर्राटे, नींद में दम घुटना, सांस रुकना और दिन में अत्यधिक नींद आना चेतावनी के संकेत हैं। हालांकि, हर खर्राटा स्लीप एपनिया नहीं होता। ऐसे लक्षणों पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर स्लीप टेस्ट कराया जा सकता है। OSA के साथ मोटापा, डायबिटीज या अन्य मेटाबॉलिक जोखिम होने पर डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री और जांच के आधार पर फैटी लिवर या फाइब्रोसिस की जांच सुझा सकते हैं।

उपचार में वजन घटाना, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण शामिल हैं। कुछ मरीजों को CPAP मशीन की जरूरत भी पड़ सकती है।

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