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Sleep Paralysis vs Stroke! जानिए क्या है अंतर

रात में अचानक जागने पर शरीर न हिलना, बोल न पाना और सीने पर दबाव महसूस होना कई लोगों को स्ट्रोक का संकेत लगता है। लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह अक्सर स्लीप पैरालिसिस होता है, जिसमें व्यक्ति जाग जाता है, लेकिन REM नींद के दौरान होने वाला अस्थायी मांसपेशी पक्षाघात कुछ समय तक बना रहता है। करीब हर पांच में से एक व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार इसका अनुभव हो सकता है।

क्यों होता है स्लीप पैरालिसिस?

REM (Rapid Eye Movement) नींद में शरीर की अधिकांश स्वैच्छिक मांसपेशियां निष्क्रिय हो जाती हैं, जिसे REM Atonia कहा जाता है। यह सुरक्षा तंत्र सपनों के दौरान शरीर को हरकत करने से रोकता है। यदि चेतना पहले लौट आए और यह पक्षाघात बाद में खत्म हो, तो व्यक्ति कुछ सेकंड या मिनट तक जागते हुए भी हिल-डुल नहीं पाता।

यह इतना डरावना क्यों लगता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, खतरे को पहचानने वाला मस्तिष्क का हिस्सा सक्रिय रहता है। इसलिए कई लोगों को कमरे में किसी की मौजूदगी, सीने पर दबाव, डर या अलौकिक अनुभव जैसा एहसास होता है। हालांकि यह खतरनाक नहीं होता और मस्तिष्क को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता।

स्ट्रोक और स्लीप पैरालिसिस में अंतर

स्लीप पैरालिसिस

  • सोते या जागते समय होता है।
  • कुछ सेकंड या मिनट तक शरीर और आवाज बंद हो सकती है।
  • व्यक्ति पूरी तरह सचेत रहता है।
  • लक्षण पूरी तरह खत्म हो जाते हैं।

स्ट्रोक

  • किसी भी समय हो सकता है।
  • एक तरफ कमजोरी, चेहरे का टेढ़ापन, लड़खड़ाती आवाज, दृष्टि और संतुलन की समस्या हो सकती है।
  • मस्तिष्क में रक्त प्रवाह रुकने से कोशिकाएं नष्ट होती हैं।
  • यह मेडिकल इमरजेंसी है।

किन लोगों में खतरा ज्यादा?

नींद की कमी, तनाव, जेट लैग और अनियमित दिनचर्या इसके सामान्य कारण हैं। बार-बार एपिसोड आना, दिन में अत्यधिक नींद या अचानक मांसपेशियों की कमजोरी नार्कोलेप्सी या अन्य नींद संबंधी विकारों का संकेत हो सकता है।

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?

यदि पूरी तरह जागने के बाद भी शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, चेहरे का झुकना, अस्पष्ट बोलना, भ्रम, दृष्टि या संतुलन संबंधी समस्या बनी रहे, तो स्ट्रोक की आशंका मानकर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रोक में हर मिनट लाखों मस्तिष्क कोशिकाएं नष्ट हो सकती हैं।

डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?

स्लीप पैरालिसिस के दौरान घबराने के बजाय धीरे-धीरे सांस लें और आंखें झपकाने या उंगलियां-पैर की उंगलियां हिलाने की कोशिश करें। अधिकांश मामलों में यह स्थिति कुछ ही मिनटों में अपने आप समाप्त हो जाती है।

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Tanisha Verma

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