South Korea Hypersonic Missile Test: दक्षिण कोरिया ने अक्टूबर 2026 में स्वदेशी हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) का पहला सफल परीक्षण किया। इस दौरान मिसाइल ने 6,174 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार से उड़ान भरते हुए समुद्र में निर्धारित लक्ष्य को सटीक निशाना बनाया। इसे देश की सामरिक रक्षा क्षमता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया जा रहा है।
उड़ान के दौरान बदली दिशा, सटीक निशाना लगाया
परीक्षण में HGV बूस्टर से अलग होकर निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ा। इसने ऊंचाई से नीचे आते हुए क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दिशाओं में बदलाव किया और लक्ष्य भेदा। इस दौरान अत्यधिक तापमान सहने वाली सामग्री, मार्गदर्शन प्रणाली और नियंत्रण तकनीक की जांच की गई। राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने स्वयं परीक्षण देखा। दक्षिण कोरिया इसे कोरियाई प्रायद्वीप के महत्वपूर्ण ठिकानों पर अचानक सटीक हमला करने में सक्षम रणनीतिक हथियार मान रहा है।
उत्तर कोरिया से बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा
उत्तर कोरिया ने 2022 में अपने पहले सफल HGV परीक्षण की घोषणा की थी। पिछले एक महीने में उसने दो और परीक्षण किए हैं, जिन्हें उसकी बढ़ती सैन्य क्षमता से जोड़ा जा रहा है। दक्षिण कोरिया का ताजा परीक्षण इसी चुनौती का जवाब माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच हाइपरसोनिक हथियारों की प्रतिस्पर्धा क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
क्यों खास है हाइपरसोनिक तकनीक?
पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत HGV कम ऊंचाई पर अत्यधिक गति से उड़ते हुए दिशा बदल सकता है। इससे इसे रोकना कठिन होता है। दक्षिण कोरिया इस तकनीक को अपनी 'किल चेन' और प्रतिरोधक रणनीति का हिस्सा बनाना चाहता है। देश अब इसके विकास और जल्द तैनाती पर जोर दे रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सफल परीक्षण के बावजूद पूर्ण परिचालन क्षमता हासिल करने में समय लगेगा। पूर्वी एशिया में हथियारों की होड़ रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी जरूरी होंगे। यह उपलब्धि दक्षिण कोरिया की तकनीकी प्रगति और रक्षा आत्मनिर्भरता को दर्शाती है, जबकि आगे और परीक्षण जारी रहेंगे।
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