Middle East tensions: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने ऊर्जा भंडार और आपूर्ति चैनलों की स्थिति को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में कच्चे तेल और परिष्कृत ईंधन का इतना भंडार है कि यह लगभग 25 दिनों तक देश की आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। यह पर्याप्त समय देश को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश और योजना बनाने का अवसर देता है।
अधिकारियों का कहना है कि तेल, एलपीजी और एलएनजी के आयात के लिए वैकल्पिक देशों से सप्लाई सुनिश्चित करने पर काम चल रहा है। इसके लिए वैश्विक बाजारों में कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। फिलहाल, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है और इसे स्थिर बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने सोमवार को घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब बंद है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले किसी भी जहाज को निशाना बनाया जा सकता है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है और इसके बंद होने की घोषणा से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण तेल और गैस टैंकरों के आवागमन पर जोखिम बढ़ गया है। कई जहाज इस मार्ग से बचने लगे हैं और कुछ ने अपनी यात्रा स्थगित कर दी है। बीमा कंपनियों ने भी इस क्षेत्र में यात्रा करने वाले जहाजों का बीमा नवीनीकरण रोक दिया है, जिससे समुद्री परिवहन और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
सोमवार को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हवाई हमलों की तीव्रता बढ़ा दी। इज़राइल ने लेबनान में भी हवाई हमले किए, जबकि ईरान ने खाड़ी देशों में ऊर्जा अवसंरचना और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों को निशाना बनाया। यह कार्रवाई क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा रही है और वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव डाल रही है।
इस बढ़ते तनाव के कारण तेल की वैश्विक कीमतों में लगातार तीसरे सत्र में वृद्धि देखी गई। व्यापारियों ने कहा कि मध्य पूर्व से आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है। तेल और गैस परिवहन की लागत में भी तेजी आई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो रहा है।
भारत फिलहाल अपने 25 दिनों के तेल भंडार के कारण कुछ राहत महसूस कर रहा है। सरकार और ऊर्जा अधिकारी वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश में हैं ताकि किसी भी तरह के संकट के समय देश की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। अधिकारी यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव न आए।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा। यदि जलमार्ग बंद रहता है या किसी भी तरह की आपूर्ति बाधा आती है, तो भारत को तेजी से वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ना होगा। इसके अलावा, घरेलू ऊर्जा भंडार और रणनीतिक तेल भंडार को सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।
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