मिडिल ईस्ट में जंग की आग और भड़की
West Asia Crisis: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। मिसाइल और ड्रोन हमलों की नई श्रृंखला के बाद कई देशों की सुरक्षा व्यवस्था हाई अलर्ट पर पहुंच गई है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि अमेरिका को कुवैत में अपने दूतावास का कामकाज अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध की शुरुआत के बाद से अब तक ईरान में लगभग 1230 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं लेबनान में 100 से अधिक लोगों ने जान गंवाई है, जबकि इस्राइल में भी करीब एक दर्जन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। लगातार हो रहे हमलों के कारण पूरे क्षेत्र में डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
कुवैत में संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों की आशंका के बाद अमेरिका ने बड़ा एहतियाती कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की कि कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास में नियमित कामकाज फिलहाल निलंबित कर दिया गया है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस घटना में किसी अमेरिकी कर्मचारी के घायल होने की खबर नहीं है।
इस बीच कतर के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि राजधानी दोहा के पास स्थित अल उदैद एयरबेस को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमले को वायु रक्षा प्रणाली ने समय रहते विफल कर दिया। इससे पहले कतर प्रशासन ने नागरिकों को सुरक्षा अलर्ट जारी करते हुए घरों में रहने की सलाह दी थी। इस एयरबेस को अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए बेहद अहम सैन्य केंद्र माना जाता है।
लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाकों में इस्राइल ने बड़ा सैन्य अभियान चलाया। हमले से पहले वहां रहने वाले लोगों को तत्काल अपने घर खाली करने का आदेश दिया गया था। इसके बाद शहर की सड़कों पर भारी भीड़ और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हजारों लोग सुरक्षित जगहों की तलाश में शहर छोड़ने को मजबूर हो गए। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई पिछले सप्ताह ईरान पर हुए अमेरिकी और इस्राइली हमलों के बाद तेज हुए संघर्ष का हिस्सा है।
लेबनान के संगठन हिजबुल्लाह ने करीब एक साल बाद इस्राइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इसके जवाब में इस्राइल ने दक्षिणी लेबनान और बेरूत के आसपास के क्षेत्रों पर सैन्य कार्रवाई तेज कर दी। अब तक इस संघर्ष में 123 लोगों की मौत हो चुकी है और 83,000 से अधिक लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हुए हैं। इस्राइल के वित्त मंत्री बेज़ेल स्मोट्रिच ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो हिजबुल्लाह के नियंत्रण वाले इलाके गाजा के खान यूनिस जैसी तबाही का सामना कर सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के मुताबिक, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के कारण 3.3 लाख से ज्यादा लोग अपने घरों से पलायन कर चुके हैं। इनमें लगभग 1 लाख लोग तेहरान से, 84 हजार से ज्यादा लोग लेबनान से, और करीब 1.18 लाख लोग अफगानिस्तान व पाकिस्तान से विस्थापित हुए हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि पिछले 72 घंटों में ईरान के करीब 200 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों में भूमिगत बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर और कम से कम 30 ईरानी जहाज नष्ट किए जाने की बात कही गई है।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि उसने टेल अवीव और मध्य इस्राइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों के बाद इस्राइल के कई शहरों में लगातार सायरन बजते रहे और लोगों को बंकरों में शरण लेनी पड़ी।
अमेरिका में भी इस युद्ध को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। रिपब्लिकन बहुमत वाली हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 219-212 वोटों से उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया जिसमें ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से पहले कांग्रेस की अनुमति अनिवार्य करने की मांग की गई थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया कि वे ईरान में भविष्य के सर्वोच्च नेता के चयन में भूमिका निभाना चाहते हैं और वहां अमेरिका समर्थक नेतृत्व देखना चाहते हैं। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में बढ़ती जंग से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में पड़ सकती है और इससे वैश्विक स्तर पर कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है।
संघर्ष का दायरा अब और फैलता नजर आ रहा है। ईरान ने पड़ोसी अजरबैजान पर भी ड्रोन हमला किया, जिसमें नखचिवान अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के टर्मिनल भवन को नुकसान पहुंचा और दो लोग घायल हो गए। हालांकि ईरान ने आधिकारिक तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
विश्लेषकों के अनुसार, अब तक इस जंग का असर ईरान, इस्राइल, अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कुवैत, कतर, ओमान, लेबनान, साइप्रस, इराक, तुर्किये और अजरबैजान सहित कम से कम 14 देशों तक पहुंच चुका है। तेल अवीव और येरुशलम में लगातार मिसाइल अलर्ट के बीच पूरा क्षेत्र युद्ध के सबसे गंभीर दौर से गुजर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष और बड़े वैश्विक संकट का रूप ले सकता है।
ये भी पढ़ें: ईरान-इजराइल जंग का असर, ट्रंप का अचानक बदला रुख? भारत के लिए खुला रूसी तेल का रास्ता
IIT Bombay Student Death: IIT बॉम्बे के 20 वर्षीय BTech छात्र के माता-पिता ने मुंबई…
Rahul Gandhi Vote Chori Allegation: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मुख्य…
AI E-Waste: दुनिया में AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग मशीनों…
Meerut: मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के ध्वस्तीकरण से प्रभावित करीब 650 व्यापारियों को…
ECINet Voter Deletion Rollback: चुनाव आयोग ने India Today को बताया कि ECINet सिस्टम में…
CJP Gyanesh Kumar Resignation Demand: नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर Cockroach Janta Party (CJP)…