TMC Rebel MPs: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने दावा किया है कि उनके साथ सांसदों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब 22 सांसद उनके समर्थन में हैं। उन्होंने कहा कि उनका समूह जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अलग संसदीय गुट के रूप में मान्यता देने की मांग करेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब TMC पहले से ही संगठनात्मक चुनौतियों और आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से TMC के भीतर असंतुष्ट सांसदों का एक समूह पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर आवाज उठा रहा है। इस समूह का नेतृत्व काकोली घोष दस्तिदार कर रही हैं। इससे पहले भी उन्होंने दावा किया था कि लगभग 20 सांसद उनके साथ हैं और उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर अलग बैठने की व्यवस्था तथा अलग संसदीय पहचान की मांग की है। अब काकोली का कहना है कि उनके समर्थन में सांसदों की संख्या और बढ़ी है, जिसके चलते वे औपचारिक रूप से अलग गुट की मान्यता मांगने की तैयारी कर रहे हैं।
भारतीय राजनीति में किसी संसदीय दल के भीतर टूट की स्थिति में सांसदों की संख्या बेहद अहम होती है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद अलग रुख अपनाते हैं तो उन्हें दलबदल कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में कानूनी सुरक्षा मिल सकती है। यही वजह है कि बागी सांसद लगातार अपने समर्थन का आंकड़ा बढ़ने का दावा कर रहे हैं। काकोली गुट का मानना है कि उन्हें लोकसभा में अलग पहचान मिलनी चाहिए, जबकि TMC नेतृत्व इन दावों को चुनौती दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में सांसद बागी खेमे के साथ जाते हैं तो यह ममता बनर्जी और TMC नेतृत्व के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। हाल के दिनों में पार्टी संगठन में कई बदलाव किए गए हैं और कुछ नेताओं को उनके पदों से हटाया भी गया है। इन फैसलों को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है। बागी नेताओं का आरोप है कि पार्टी के भीतर उनकी बात नहीं सुनी जा रही थी, जबकि नेतृत्व का कहना है कि कुछ नेता व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के कारण पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं।
बागी सांसदों ने पहले दावा किया था कि वे केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने के पक्ष में हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि उनका उद्देश्य सीधे किसी अन्य दल में शामिल होना नहीं, बल्कि एक अलग संसदीय पहचान के साथ काम करना है। इस दावे ने राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। इस मुद्दे पर भाजपा और TMC दोनों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जिससे राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है।
अब सभी की नजर लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि बागी सांसद औपचारिक रूप से अलग गुट की मान्यता की मांग करते हैं, तो स्पीकर को उनके दावों, समर्थन संख्या और संसदीय नियमों के आधार पर निर्णय लेना होगा। यह फैसला न केवल TMC की आंतरिक राजनीति बल्कि संसद में विपक्ष की ताकत पर भी असर डाल सकता है।
काकोली घोष दस्तिदार के नेतृत्व में उभरा बागी गुट TMC के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। सांसदों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इतना स्पष्ट है कि पार्टी के भीतर मतभेद अब सार्वजनिक रूप ले चुके हैं। यदि बागी खेमे को पर्याप्त समर्थन मिलता है और स्पीकर से अलग गुट की मान्यता मिलती है, तो पश्चिम बंगाल की राजनीति और संसद दोनों में इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। आने वाले दिनों में यह मामला राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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