India US trade deal 2026: अमेरिका के राजदूत सर्जिया गोर ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंधों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभाई।
गोर ने कहा कि इस समझौते को अंतिम रूप देने में दो ही लोग निर्णायक साबित हुए। राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी। उनके अनुसार दोनों नेताओं के बीच वर्षों से विकसित हुआ व्यक्तिगत भरोसा और दोस्ती इस पूरे समझौते की प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि कई बार कूटनीतिक वार्ताओं में व्यक्तिगत रिश्ते भी बड़ी भूमिका निभाते हैं और इस मामले में भी ऐसा ही हुआ।
गोर के मुताबिक मोदी और ट्रंप के बीच बना भरोसा केवल औपचारिक संबंधों तक सीमित नहीं है। यह रिश्ता लगातार संपर्क और आपसी समझ पर आधारित रहा है, जिसने कठिन दौर में भी दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर बनाए रखा।
भारत और अमेरिका ने करीब एक साल तक चली लंबी बातचीत के बाद पिछले महीने इस व्यापार समझौते पर सहमति बनाई। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए और कुछ समय के लिए संबंधों में तनाव भी देखा गया। प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय आयात पर लगाए गए टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया। इसे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
कुछ महीने पहले तक भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव साफ नजर आ रहा था। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत की आलोचना की थी। अमेरिका का आरोप था कि यह खरीदारी अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन में रूस की सैन्य गतिविधियों को वित्तीय सहायता दे रही है।
इसी विवाद के दौरान अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ भी लगा दिया था। उस समय ट्रंप और उनके कुछ सहयोगियों की ओर से तीखी टिप्पणियां भी की गई थीं। भारत को रूस का “मनी लॉन्ड्रोमैट” तक कहा गया और भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भी कठोर बयान दिए गए थे।
हालांकि इन विवादों के बावजूद ट्रंप अक्सर प्रधानमंत्री मोदी को अपना मित्र बताते रहे। गोर ने कहा कि दोनों नेताओं का रिश्ता कई वर्षों पुराना है और यह उस समय भी मजबूत बना रहा जब ट्रंप व्हाइट हाउस में नहीं थे।
उन्होंने बताया कि उस दौरान भी मोदी और ट्रंप के बीच संपर्क बना रहा, जिसे ट्रंप ने सच्ची मित्रता का संकेत माना। गोर के अनुसार इसी भरोसे ने व्यापार समझौते की बातचीत के दौरान कई जटिल मुद्दों को सुलझाने में मदद की।
गोर ने स्वीकार किया कि इस समझौते तक पहुंचने की प्रक्रिया आसान नहीं थी। उन्होंने ट्रंप के उस बयान का भी समर्थन किया जिसमें भारत को “कठिन वार्ताकार” कहा गया था। फिर भी उन्होंने माना कि भारत ने बातचीत के दौरान अपने राष्ट्रीय हितों की मजबूती से रक्षा की। गोर ने कहा कि मोदी सरकार ने समझदारी से बातचीत करते हुए ऐसा संतुलित समझौता हासिल किया है, जिसे दोनों देशों के लिए लाभकारी माना जा सकता है।
गोर ने यह भी कहा कि लगभग एक साल में इस समझौते तक पहुंचना काफी तेज प्रक्रिया रही है। उन्होंने इसकी तुलना भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए समझौते से की, जिसमें लगभग दो दशक की बातचीत लगी थी।
हालांकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के व्यापक वैश्विक टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद इस समझौते की स्थिति को लेकर कुछ अनिश्चितता बनी हुई है। पहले उम्मीद थी कि इस पर मार्च के मध्य तक हस्ताक्षर हो जाएंगे।
इसके बावजूद गोर ने विश्वास जताया कि भारत इस समझौते का सम्मान करेगा, क्योंकि इसमें उन वस्तुओं की खरीद भी शामिल है जो भारत के आर्थिक विकास और औद्योगिक विस्तार के लिए जरूरी हैं। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका भारत को एक मजबूत और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है।
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