Diabetes: भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण यह बीमारी अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। डायबिटीज मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है, टाइप 1 और टाइप 2 । अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर इनमें से कौन-सी डायबिटीज ज्यादा खतरनाक होती है। इसका जवाब केवल बीमारी के प्रकार से नहीं, बल्कि उसके नियंत्रण पर भी निर्भर करता है।
टाइप 1 डायबिटीज में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) गलती से अग्न्याशय (पैंक्रियाज) की उन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा देती है जो इंसुलिन बनाती हैं। इसके कारण शरीर में इंसुलिन बनना लगभग बंद हो जाता है। ऐसे मरीजों को जीवनभर इंसुलिन इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। यदि समय पर इंसुलिन न लिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन तो बनाता है, लेकिन उसका सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता। इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। समय के साथ इंसुलिन का उत्पादन भी कम होने लगता है। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और कई बार लंबे समय तक इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कहना सही नहीं होगा कि सिर्फ टाइप 1 या सिर्फ टाइप 2 डायबिटीज ज्यादा खतरनाक है। असली खतरा तब होता है जब लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं रहती। टाइप 1 डायबिटीज में इंसुलिन न लेने पर डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) जैसी गंभीर और जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है। वहीं टाइप 2 डायबिटीज अक्सर बिना किसी बड़े लक्षण के वर्षों तक बढ़ती रहती है। कई मरीजों को तब बीमारी का पता चलता है, जब इसका असर किडनी, आंखों, हृदय या नसों पर पड़ चुका होता है।
यदि ब्लड शुगर लंबे समय तक अधिक बनी रहे तो इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है, जैसे—
आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है।
किडनी की कार्यक्षमता कम हो सकती है।
हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
नसों को नुकसान पहुंच सकता है।
पैरों में घाव भरने में समय लग सकता है।
टाइप 2 डायबिटीज को सही जीवनशैली अपनाकर काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए
रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।
संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
वजन को नियंत्रित रखें।
पर्याप्त नींद लें।
तनाव कम करने की कोशिश करें।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं और नियमित जांच कराते रहें।
टाइप 1 डायबिटीज में केवल खानपान या व्यायाम से बीमारी नियंत्रित नहीं होती। मरीज के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित इंसुलिन लेना, ब्लड शुगर की जांच करना और संतुलित दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी होता है।
डायबिटीज का कोई भी प्रकार हल्के में लेने योग्य नहीं है। टाइप 1 और टाइप 2 दोनों की चुनौतियां अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों में समय पर इलाज और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना सबसे महत्वपूर्ण है। सही खानपान, नियमित व्यायाम, समय पर दवा और डॉक्टर की सलाह का पालन करके डायबिटीज से होने वाली गंभीर जटिलताओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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