Sunday, Oct 11

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भारत में मानवाधिकारों पर UN ने जताई चिंता, केंद्र सरकार ने आरोपों को बताया बेबुनियाद, दिया संविधान का हवाला

India UN Human Rights Row: भारत में लोगों के शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने के अधिकार को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन की चिंता पर अब भारत ने जवाब दिया है। जिनेवा स्थित भारतीय मिशन ने इन चिंताओं को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां शांतिपूर्ण सभा का अधिकार संविधान से मिलता है। मिशन ने यह भी कहा कि देश में मजबूत संस्थाएं, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया इस अधिकार की रक्षा करते हैं।

भारत ने UN की चिंताओं को बताया बेबुनियाद

जिनेवा स्थित भारतीय मिशन ने कहा कि भारत में शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने के अधिकार का इस्तेमाल सार्वजनिक व्यवस्था के हित में उचित प्रतिबंधों के तहत किया जाता है। मिशन के मुताबिक, अधिकारी कानून के अनुसार काम करते हैं और किसी भी शिकायत के समाधान के लिए अदालतें सभी नागरिकों के लिए उपलब्ध हैं। बयान में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन की चिंताओं को गलत बताते हुए कहा गया कि ये भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक दखल हैं। भारतीय मिशन ने संगठन से निष्पक्षता और भेदभाव रहित रवैया अपनाने की अपील करते हुए कहा कि उसे दूसरे देशों में बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए।

दिल्ली में हिरासत की खबरों पर UN ने जताई थी चिंता

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों, प्रदर्शन के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता जताई थी। संगठन ने अधिकारियों से मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तत्काल और बिना किसी शर्त के रिहा करने की मांग की थी। इसके बाद जिनेवा स्थित भारतीय मिशन ने इन चिंताओं को बेबुनियाद बताते हुए भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों, स्वतंत्र न्यायपालिका और संवैधानिक अधिकारों का हवाला दिया।

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