उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दी गई। सरकार का कहना है कि यह फैसला न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है, ताकि पंचायत चुनावों में पिछड़े वर्गों को आनुपातिक आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 12 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। इनमें सबसे अहम फैसला पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर रहा। सरकार ने ग्रामीण स्थानीय निकायों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर नई प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है।
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। यह आयोग राज्य की त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में पिछड़े वर्गों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का अध्ययन करेगा। इसके आधार पर पंचायत स्तर पर OBC वर्ग को आनुपातिक आरक्षण देने की सिफारिश की जाएगी।
सरकार की ओर से गठित किए जाने वाले इस आयोग में कुल पांच सदस्य शामिल होंगे। इनमें एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज को आयोग का अध्यक्ष बनाया जाएगा। आयोग के सदस्यों का चयन ऐसे लोगों में से किया जाएगा, जिन्हें पिछड़ा वर्ग से जुड़े मामलों की विशेष जानकारी हो। आयोग का कार्यकाल नियुक्ति की तारीख से छह महीने तक रहेगा।
प्रदेश में पहले से पंचायतों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू है। संविधान के प्रावधानों के अनुसार OBC वर्ग को अधिकतम 27 प्रतिशत तक आरक्षण दिया जा सकता है। अब सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक डेटा आधारित आरक्षण व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है।
ओबीसी आयोग राज्य के सभी 75 जिलों में बैठक करेगा और जातिवार आंकड़ों की समीक्षा करेगा। इसके बाद आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। बताया जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में करीब छह महीने का समय लग सकता है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद राजनीतिक दलों और अन्य पक्षों से सुझाव और आपत्तियां भी मांगी जाएंगी।
सूत्रों के मुताबिक आयोग की रिपोर्ट सितंबर या अक्टूबर तक आ सकती है। ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पंचायत चुनाव कराना सरकार के लिए राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाएं। फिलहाल पंचायतों का कार्यकाल मई में समाप्त हो रहा है, ऐसे में सरकार प्रशासक नियुक्त करने पर विचार कर सकती है।
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