भगवान गणेश को समर्पित विनायक चतुर्थी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के दौरान पड़ रहा है, जिसके कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से भगवान गणपति भक्तों की सभी बाधाएं दूर करते हैं और मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। वर्ष 2026 में श्रावण मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी, जिसे वरद या विनायक चतुर्थी कहा जाता है, 16 अगस्त 2026, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन गणेश पूजा और व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।
शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक या वरद चतुर्थी कहा जाता है। “वरद” का अर्थ है वरदान देने वाला। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से बुद्धि, सफलता, धन और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ माना जाता है जो जीवन में रुकावटों, आर्थिक समस्याओं या कार्य में बाधाओं का सामना कर रहे हों।
अधिकमास को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। यह अतिरिक्त चंद्र मास लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है और भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान और व्रत का फल कई गुना अधिक माना जाता है। जब वरद चतुर्थी जैसे गणेश व्रत अधिकमास में पड़ते हैं, तो इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश और भगवान विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले उनकी पूजा की जाती है। वरद चतुर्थी का व्रत रखने से रुके हुए कार्य पूरे होते हैं । नौकरी और व्यवसाय में सफलता मिलती है, आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। बुद्धि और विवेक में वृद्धि होती है।
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें। लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
विधिवत पूजा: भगवान गणेश को सिंदूर, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें। मोदक का भोग लगाएं और आरती करें।
मंत्र जाप: “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
व्रत पारण: पूजा के बाद फलाहार करें या अगले दिन पारण करें, जैसा परिवार की परंपरा हो।
भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अत्यंत प्रिय हैं। दूर्वा अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, जबकि मोदक ज्ञान और आनंद का प्रतीक माना जाता है।
यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है, जिनके कार्य बार-बार रुक जाते हों, विद्यार्थियों को एकाग्रता की आवश्यकता हो, नौकरी या व्यापार में बाधाएं आ रही हों, विवाह में देरी हो रही हो, आर्थिक संकट बना हुआ हो ।
वरद चतुर्थी केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, श्रद्धा और सकारात्मक सोच का पर्व है। भगवान गणेश की आराधना से व्यक्ति को मानसिक शांति, निर्णय क्षमता और सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
वरद चतुर्थी अधिकमास में पड़ने के कारण अत्यंत शुभ मानी जा रही है। इस दिन सच्ची श्रद्धा से भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है। यदि आप लंबे समय से किसी समस्या से परेशान हैं, तो यह दिन गणपति बप्पा की कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर हो सकता है।
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