Gig Workers Strike
Gig Workers Strike: नए साल के उत्सव से पहले देशभर के गिग वर्कर्स की हड़ताल ने फूड और राइड डिलीवरी सेवाओं में खलबली मचा दी है। इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के आह्वान पर शुरू हुई यह हड़ताल बुधवार से लागू हो गई है। हड़ताल का मुख्य उद्देश्य 10 मिनट डिलीवरी के विकल्प को समाप्त करना और डिलीवरी के लिए भुगतान प्रणाली में सुधार लाना है।
हड़ताल का असर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और अन्य बड़े शहरों में साफ नजर आया। कई राइडर्स ने साफ कहा कि वे 14-16 घंटे काम करने के बावजूद भी मेहनत के मुताबिक वेतन नहीं पा रहे हैं। एक राइडर ने बताया, “हम मुस्कुराते हुए ग्राहकों को सेवा देते हैं और रेटिंग मांगते हैं, लेकिन यदि ऑर्डर रद्द हो जाता है, तो जुर्माना हमारे हिस्से में आता है। बीमा सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। हमें काम के हिसाब से सही वेतन नहीं मिलता।”
एक अन्य डिलीवरी एजेंट ने हाल ही में हुए एक्सीडेंट का जिक्र करते हुए कहा कि बाराखंबा में हुए हादसे में घायल राइडर को कोई क्लेम नहीं मिला। टीम लीडर और वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करने पर भी कोई जवाब नहीं आया। “हमने अपने सहयोगियों की मदद के लिए स्वयं 1000-2000 रुपये जमा किए, और अब वह राइडर रात में भी काम करने को मजबूर है,” उन्होंने बताया।
गिग वर्कर्स का कहना है कि पुराने रेट कार्ड में बदलाव ने उनकी कमाई प्रभावित की है। पहले रेट कार्ड संतोषजनक था, लेकिन अब नई व्यवस्था में राइडर्स को नुकसान उठाना पड़ रहा है। “हमारे लिए प्रमोशन नहीं, बल्कि डिमोशन का माहौल बन गया है। हमें गुजारा करने के लिए 15-16 घंटे काम करना पड़ता है, फिर भी वेतन सिर्फ 700-800 रुपये मिल रहा है।”
हड़ताल का असर पहले ही 25 दिसंबर को दिखाई दिया था, जब लगभग 50-60 प्रतिशत ऑर्डर प्रभावित हुए थे। इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के अनुसार, इस बार देशभर के हजारों गिग वर्कर्स हड़ताल में शामिल होंगे और डिलीवरी सेवाओं में और ज्यादा रुकावटें आएंगी। तेलंगाना गिग वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष शेख सलाहुद्दीन ने कहा, “10 मिनट डिलीवरी मॉडल कर्मचारियों की सुरक्षा को खतरे में डालता है। इसके साथ ही नई भुगतान प्रणाली से उनकी कमाई भी कम हो गई है। हम मांग करते हैं कि पुरानी भुगतान प्रणाली बहाल की जाए और सभी प्लेटफॉर्म्स से 10 मिनट डिलीवरी का विकल्प हटाया जाए। हम केंद्र और राज्य सरकार से हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं।”
गिग वर्कर्स वे लोग होते हैं जो स्थायी कर्मचारियों के बजाय फ्रीलांसर या अस्थायी आधार पर काम करते हैं। इनमें राइडर्स, डिलीवरी एजेंट और अन्य प्लेटफॉर्म-आधारित कर्मचारी शामिल हैं। हाल के श्रम कानून संशोधन ने इन्हें कानूनी पहचान दी और सामाजिक सुरक्षा लाभों जैसे दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य लाभ, मातृत्व लाभ आदि के लिए पात्र बनाया। इससे पहले ये कर्मचारी PF, ESI या पेंशन जैसी सुविधाओं के लिए योग्य नहीं थे।
श्रम कानून में हुए बदलाव के बाद अब गिग वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी कोष में योगदान, शिकायत निवारण केंद्र और अन्य सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं। इसके बावजूद, काम के अनुसार वेतन न मिलने, बीमा क्लेम की समस्याओं और सुरक्षा की कमी ने गिग वर्कर्स को हड़ताल की ओर धकेल दिया। देशभर में चल रही यह हड़ताल नए साल के जश्न पर भी असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कंपनियां जल्द ही हड़ताल का समाधान नहीं करतीं, तो फूड डिलीवरी और राइडिंग सेवाओं में लंबी रुकावटें देखने को मिल सकती हैं।
Trump on BRICS: ब्रिक्स 2026 के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी…
Bihar: बिहार के बांका जिले में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के आधार पर…
Air India Pilot Suspended: स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख से दिल्ली आने वाली एयर इंडिया की उड़ान…
Pig Kidney Xenotransplantation India: किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई…
Congress Protest Against Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की…
Brajesh Pathak Hindi Prescription: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदेश…