West Bengal UCC: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में अगले छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और गुजरात के बाद पश्चिम बंगाल में भी UCC लागू की जाएगी। इसके साथ ही जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ सख्त कानून बनाने की बात भी कही। अधिकारी ने रविवार को नंदीग्राम उपचुनाव के प्रचार के आखिरी दिन ये घोषणाएं कीं।
जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ बनेगा कानून
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाएगा। उन्होंने राज्य में धार्मिक आयोजनों की जानकारी देते हुए बताया कि 17 नवंबर को कोलकाता में हनुमान चालीसा का पाठ होगा। इसके बाद 29 दिसंबर को ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में गीता पाठ का आयोजन किया जाएगा।
ममता बनर्जी की चोट को लेकर फिर उठाए सवाल
नंदीग्राम उपचुनाव के प्रचार के आखिरी दिन शुभेंदु अधिकारी ने बीजेपी उम्मीदवार हसीरानी रथ के समर्थन में पैदल मार्च निकाला। हसीरानी रथ, अधिकारी के करीबी सहयोगी रहे चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जिनकी हत्या कर दी गई थी। इस दौरान अधिकारी ने 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट को लेकर फिर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान पैर में चोट लगने का गलत दावा किया था। एक दिन पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने इस संबंध में एक दस्तावेज दिखाते हुए दावा किया था कि मेडिकल रिपोर्ट में फ्रैक्चर का कोई सबूत नहीं था।
CID के दुरुपयोग का लगाया आरोप
शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व की TMC सरकार पर बीजेपी नेताओं को फंसाने के लिए CID का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि 2021 के चुनाव के दौरान बीजेपी नेताओं के खिलाफ हत्या की कोशिश के मामले दर्ज किए गए, जबकि आधिकारिक दस्तावेजों में फ्रैक्चर नहीं होने की बात सामने आई थी। अधिकारी ने कहा कि आदर्श आचार संहिता हटने के बाद वह कानून के तहत जरूरी कदम उठाएंगे। उन्होंने कथित तौर पर परेशान किए गए बीजेपी कार्यकर्ताओं को कानूनी मदद दिलाने की बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि झूठे आरोप लगाने पर भारतीय न्याय संहिता के तहत सजा का प्रावधान है।
UCC लागू करने की घोषणा पर सबकी नजर
शुभेंदु अधिकारी की UCC लागू करने और जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ सख्त कानून बनाने की घोषणा पश्चिम बंगाल की राजनीति में अहम मानी जा रही है। हालांकि, राज्य में इसे लागू करने की प्रक्रिया और प्रस्तावित कानूनों का विस्तृत खाका सामने आना बाकी है।
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