अध्यात्म

Why is Holi celebrated: क्यों मनाई जाती है होली? जानिए धार्मिक परंपरा और महत्व

Why is Holi celebrated: हिंदू धर्म में होली का पर्व होलिका दहन से प्रारंभ होता है, जिसे छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2026 में होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात संपन्न होने वाला यह अनुष्ठान केवल अग्नि प्रज्वलित करने की रस्म नहीं, बल्कि नकारात्मकता के अंत और धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस पावन अग्नि में मन की दुर्भावनाएं जलकर समाप्त हो जाती हैं और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।

भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ा है पर्व

होलिका दहन की परंपरा का संबंध पौराणिक कथा से है। असुर राजा हिरण्यकश्यप स्वयं को ईश्वर मानता था और चाहता था कि उसका पुत्र भक्त प्रह्लाद भी उसी की आराधना करे। लेकिन प्रह्लाद भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे।

जब हिरण्यकश्यप के प्रयास विफल हुए, तो उसने अपनी बहन होलिका की सहायता ली। होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, किंतु दैवी कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका स्वयं अग्नि में भस्म हो गई। यह प्रसंग दर्शाता है कि अहंकार और अधर्म चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, अंततः सत्य की ही विजय होती है।

अग्नि का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व

होलिका दहन की अग्नि को शुद्धिकरण का प्रतीक माना गया है। इस अवसर पर लोग उपले, लकड़ियां और पुराने अनुपयोगी वस्त्र अग्नि को समर्पित करते हैं, जो बुरी आदतों और मन के विकारों को त्यागने का संकेत है।

ऋतु परिवर्तन के इस समय में अग्नि का वैज्ञानिक महत्व भी बताया जाता है। परंपरागत मान्यता है कि इससे वातावरण की अशुद्धियां कम होती हैं। दहन के समय अग्नि की परिक्रमा कर अनाज अर्पित करना आने वाली फसल की समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है। इस पवित्र अग्नि के दर्शन से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।

धर्म की जीत का संदेश

होलिका दहन आज भी समाज को वही सीख देता है जो सदियों पहले देता था अडिग आस्था और सत्य के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति अंततः विजयी होता है। भक्त प्रह्लाद की कथा हमें विश्वास, धैर्य और ईश्वर-भक्ति की शक्ति का बोध कराती है।

इस दिन ईर्ष्या, क्रोध और द्वेष जैसी भावनाओं को त्यागने का संकल्प लिया जाता है। जब हम इन मूल्यों के साथ होली का स्वागत करते हैं, तो परिवार और समाज में प्रेम, सौहार्द और शांति का वातावरण बनता है। यही इस पर्व का वास्तविक संदेश है।

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Deepika Gupta

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