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युद्ध थामने का मास्टर प्लान या दबाव की रणनीति? डोनाल्ड ट्रम्प का 15-सूत्रीय ‘गुप्त शांति प्रस्ताव’ सामने

US-Iran-Israelwar: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अब एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। डोनाल्ड ट्रम्पने कथित तौर पर ईरान को 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है, जिसका मकसद Iran और Israel के बीच जारी टकराव को रोकना है। सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव सीधे नहीं बल्कि Pakistan के जरिए ईरान तक पहुंचाया गया है, जिसने इस पूरे विवाद में मध्यस्थता की पेशकश की है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह जानकारी सामने आई है।

क्या है इस ‘15-सूत्रीय योजना’ का असली खेल?

इस प्रस्ताव में ईरान के सामने कई सख्त और निर्णायक शर्तें रखी गई हैं, जिनका सीधा संबंध उसके परमाणु और सैन्य कार्यक्रम से है।

ईरान को क्या करना होगा?

• पूरी परमाणु क्षमता समाप्त करनी होगी
• यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करना होगा
• लिखित गारंटी देनी होगी कि कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा
• Strait of Hormuz को पूरी तरह स्वतंत्र समुद्री मार्ग घोषित करना होगा
• बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्रों की संख्या और मारक क्षमता पर सख्त सीमाएं स्वीकार करनी होंगी
• मध्य पूर्व में सक्रिय अपने सहयोगी संगठनों (जैसे हिजबुल्लाह और हूती) को हर तरह की मदद बंद करनी होगी

30 दिन का ‘युद्धविराम’

इस योजना का एक अहम हिस्सा है 30 दिनों का युद्धविराम, यानी एक महीने तक पूरी तरह युद्ध रोकने का प्रस्ताव।
इस दौरान दोनों पक्ष स्थायी समाधान की दिशा में बातचीत कर सकते हैं।

बदले में ईरान को क्या मिलेगा?

अगर ईरान इन शर्तों को मान लेता है, तो अमेरिका की ओर से कुछ बड़े वादे भी किए गए हैं:

• ईरान पर लगे सभी परमाणु प्रतिबंध हटाए जाएंगे
• शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए सहयोग दिया जाएगा, जैसे Bushehr Nuclear Power Plant
• प्रतिबंधों को स्वतः दोबारा लागू करने वाली व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी

परमाणु खतरे को लेकर क्यों सख्त है अमेरिका-इजरायल?

अमेरिका और Israel का मानना है कि ईरान द्वारा संवर्धित यूरेनियम भविष्य में परमाणु हथियार में बदला जा सकता है। यही वजह है कि इस प्रस्ताव में परमाणु गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने की बात कही गई है।

क्या ईरान मानेगा ये शर्तें?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव शांति की दिशा में कदम जरूर है, लेकिन इसकी शर्तें ईरान के लिए काफी कठोर हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या ईरान इन शर्तों को स्वीकार करेगा या टकराव और बढ़ेगा? यह 15-सूत्रीय योजना अब सिर्फ एक प्रस्ताव नहीं, बल्कि मध्य पूर्व की राजनीति का अगला बड़ा निर्णायक मोड़ बन सकती है।

ये भी पढ़ें: कुवैत के एयरपोर्ट पर ईरान ने ड्रोन से किया हमला, फ्यूल टैंक में भीषण विस्फोट

Shagun Chaurasia

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