85 Year Old Kanwar Yatra: सावन माह में निकलने वाली कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में डूबकर लंबी यात्राएं करते हैं। लेकिन इस बार फरीदाबाद के 85 वर्षीय चंदर ने अपनी अटूट श्रद्धा और मजबूत संकल्प से सभी को प्रेरित कर दिया। उन्होंने हरिद्वार से करीब 250 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा पूरी कर यह साबित कर दिया कि सच्ची आस्था के सामने उम्र कोई बाधा नहीं होती।
'भोले बाबा का बुलावा था'
चंदर का कहना है कि इस यात्रा के पीछे उनकी गहरी धार्मिक भावना और भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास है। उन्होंने बताया कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे भोले बाबा का बुलावा आया हो। इसी श्रद्धा ने उन्हें लंबी और कठिन यात्रा पूरी करने की शक्ति दी। जहां आमतौर पर बढ़ती उम्र में लोगों के लिए लंबी दूरी तक चलना चुनौतीपूर्ण माना जाता है, वहीं चंदर ने पूरे उत्साह और विश्वास के साथ यह यात्रा पूरी की।
250 किलोमीटर का सफर बना चर्चा का विषय
जानकारी के अनुसार, चंदर हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर अपने पैतृक गांव सागरपुर पहुंचे। करीब 250 किलोमीटर की इस यात्रा के दौरान उन्होंने किसी विशेष सुविधा का सहारा नहीं लिया और श्रद्धा के साथ अपना सफर जारी रखा। उनकी यह यात्रा स्थानीय लोगों और अन्य श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बन गई। कई लोगों ने इसे भक्ति, अनुशासन और आत्मविश्वास का अनूठा उदाहरण बताया।
गांव पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत
जब चंदर अपने गांव पहुंचे तो परिवार और ग्रामीणों में खुशी का माहौल देखने को मिला। परिजनों और गांव के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। श्रद्धालु की इस उपलब्धि पर लोगों ने उन्हें बधाई दी और उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना की।
युवाओं के लिए भी बने प्रेरणा
चंदर की कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था की कहानी नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि मजबूत संकल्प और सकारात्मक सोच के साथ बड़ी से बड़ी चुनौती को पार किया जा सकता है। उनकी यह यात्रा युवाओं समेत सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए प्रेरणादायक बन गई है।
85 वर्षीय चंदर द्वारा हरिद्वार से लगभग 250 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा पूरी करना आस्था, समर्पण और दृढ़ निश्चय का शानदार उदाहरण है। उनकी इस यात्रा ने यह साबित कर दिया कि जब मन में श्रद्धा और विश्वास हो तो उम्र भी रास्ते की बाधा नहीं बनती।
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