Baby Elephant Rescue in Teesta River: पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में तीस्ता नदी से नन्हे हाथी के बच्चे के रेस्क्यू का दिल छू लेने वाला मामला सामने आया है। महज 3-4 दिन का यह बच्चा तेज बहाव में बहकर अपनी मां से करीब 4 किलोमीटर दूर चला गया। नदी में डूब रहे बच्चे पर मछुआरों की नजर पड़ी, जिसके बाद वन विभाग की टीम के साथ मिलकर उसका रेस्क्यू किया गया। खास बात ये रही कि रेस्क्यू के बाद बच्चे को उसकी मां से दोबारा मिला दिया गया।
मां से मिलते ही नन्हे हाथी को लगाया गले
रेस्क्यू के बाद डॉक्टरों ने तुरंत नन्हे हाथी की जांच की। जब वन विभाग की टीम उसे उसकी मां के पास लेकर पहुंची तो हथिनी का रिएक्शन बेहद भावुक कर देने वाला था। मां ने तुरंत अपने बच्चे को दुलारना शुरू कर दिया और उसे अपना दूध पिलाया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना शुक्रवार को उत्तरी बंगाल के मालबाजार ब्लॉक स्थित बैकुंठपुर वन प्रभाग में हुई। रेस्क्यू टीम और स्थानीय मछुआरों की मदद से बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिसके बाद उसे उसकी मां के पास पहुंचाया गया।
नदी पार करते समय मां से बिछड़ा बच्चा
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बीके शुक्रवार सुबह करीब 8:30 बजे हाथियों का एक झुंड तीस्ता नदी पार करने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान महज कुछ दिन का हाथी का बच्चा अपनी मां से अलग होकर तेज बहाव में बह गया। बैकुंठपुर के डीएफओ मुदित कुमार ने बताया कि बच्चा गाजलडोबा बैराज के पास मां से बिछड़ा और नदी के बहाव के साथ करीब 4 किलोमीटर नीचे चला गया। उस वक्त हथिनी गाजलडोबा के पास नदी के ऊपरी हिस्से में थी, जबकि बच्चा तेज धारा में बहकर काफी दूर निकल गया।
मछुआरों ने डूबते बच्चे को नाव से बचाया
तीस्ता नदी में बहते हाथी के बच्चे पर स्थानीय मछुआरों की नजर पड़ी। उन्होंने बिना देर किए छोटी नाव से उसका पीछा शुरू कर दिया। मछुआरे जब बच्चे तक पहुंचे तो वह डूबने की स्थिति में था। उन्होंने उसे नाव में खींचकर सुरक्षित बाहर निकाला और तुरंत वन विभाग को सूचना दी। डीएफओ मुदित कुमार के मुताबिक, जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बच्चे को अपने संरक्षण में ले लिया। इसके बाद डॉक्टरों ने उसकी जांच की और उसकी हालत पर नजर रखी गई। समय रहते हुए रेस्क्यू होने से नन्हे हाथी की जान बच गई। बकौल रिपोर्ट, अधिकारियों के लिए चुनौती बच्चे को ज्यादा देर तक इंसानी संपर्क से दूर रखना था। उन्हें डर था कि लंबे समय तक इंसानों के बीच रहने से मां उसे अपनाने से इनकार कर सकती है। इसलिए रेस्क्यू के तुरंत बाद बच्चे को उसकी मां और झुंड तक पहुंचा दिया गया।

