90 Second Rule for Anger: गुस्सा एक सामान्य मानवीय भावना है, लेकिन अगर यह बार-बार या अनियंत्रित रूप से आए तो दिल की सेहत पर गंभीर असर डाल सकता है। धरमशिला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार नायक के अनुसार, गुस्से के दौरान शरीर में एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल तेजी से बढ़ते हैं, जिससे दिल की धड़कन तेज होती है, रक्तचाप बढ़ता है, रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं और हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
गुस्सा क्यों खतरनाक हो सकता है?
डॉ. नायक के मुताबिक, जिन लोगों को पहले से हृदय रोग या उससे जुड़े जोखिम हैं, उनमें तीव्र गुस्सा कुछ समय के लिए हार्ट अटैक या अनियमित धड़कन (अरिद्मिया) का खतरा बढ़ा सकता है। यदि ऐसे एपिसोड बार-बार हों तो लंबे समय में हाई ब्लड प्रेशर और रक्त वाहिकाओं को नुकसान भी हो सकता है।
क्या गुस्सा निकाल देना सही है?
विशेषज्ञ का कहना है कि चिल्लाना, चीजें तोड़ना या आक्रामक व्यवहार करना गुस्से को खत्म नहीं करता, बल्कि भविष्य में ऐसी प्रतिक्रिया की संभावना बढ़ा देता है। इसलिए गुस्से को दबाने के बजाय उसे स्वस्थ तरीके से समझना और संभालना जरूरी है।
क्या है 90 सेकंड रूल?
डॉ. नायक गुस्सा नियंत्रित करने के लिए 90 सेकंड रूल अपनाने की सलाह देते हैं। इसके तहत प्रतिक्रिया देने से पहले 90 सेकंड रुकें और गहरी, धीमी सांस लें। यदि संभव हो तो कुछ देर के लिए उस जगह से हट जाएं या टहल लें। अपनी भावना को पहचानें और उसका नाम दें, फिर यह समझने की कोशिश करें कि गुस्से की असली वजह तनाव, निराशा, डर या भावनात्मक चोट तो नहीं है। पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन भी गुस्से को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं।
कब लें विशेषज्ञ की मदद?
यदि गुस्सा नियंत्रण से बाहर हो, रिश्तों या काम पर असर डाल रहा हो, व्यक्ति मौखिक या शारीरिक रूप से आक्रामक हो रहा हो या लगातार तनाव, चिंता और अवसाद महसूस कर रहा हो, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। डॉ. नायक के अनुसार कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT), माइंडफुलनेस और इमोशनल रेगुलेशन तकनीकें गुस्से के ट्रिगर पहचानने और स्वस्थ तरीके से प्रतिक्रिया देना सिखाती हैं।
विशेषज्ञ की सलाह है कि गुस्से में तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय थोड़ा इंतजार करें। केवल 90 सेकंड का विराम कई बार ऐसे शब्द, फैसले और व्यवहार रोक सकता है, जिनका पछतावा बाद में हो और जो आपके दिल पर भी अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।
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