उत्तर प्रदेश

इंजीनियर युवराज मौत केस में योगी सरकार का सख्त रुख: नोएडा CEO हटाए गए, जांच के लिए SIT गठित

Engineer Dies In Greater Noida: ग्रेटर नोएडा से सामने आई यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही, धीमे रेस्क्यू और जिम्मेदारियों से भागते तंत्र की डरावनी तस्वीर है। 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने पूरे नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पानी से भरे बेसमेंट में चार घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझते रहे युवराज आखिरकार मदद के इंतजार में दम तोड़ बैठे।

घना कोहरा, एक मोड़ और मौत का गड्ढा

16 जनवरी की रात करीब 12:30 बजे युवराज मेहता गुरुग्राम के सेक्टर-54 स्थित अपनी कंपनी से घर लौट रहे थे। वह ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसायटी में रहते थे। उस रात कोहरा इतना घना था कि सड़क पर कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था। घर के पास ही एक निर्माणाधीन मॉल के पास उनकी कार अचानक नियंत्रण खो बैठी और सड़क के किनारे बने खुले, बिना बैरिकेड वाले बेसमेंट में जा गिरी। यह बेसमेंट करीब 30 फुट गहरा था और निर्माण के पानी से पूरी तरह भरा हुआ था। युवराज की कार सीधे उस मौत के कुएं में समा गई।

“भाई, बचा लो…” आखिरी आवाजें

हादसे के बाद युवराज किसी तरह कार से बाहर निकलने में कामयाब हो गए। वह पलटी हुई कार के ऊपर खड़े होकर मदद के लिए चीखते रहे। उन्होंने तुरंत अपने पिता राजकुमार मेहता को फोन कर हादसे की जानकारी दी। पिता ने बिना देर किए 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी और खुद भी मौके के लिए रवाना हो गए। करीब डेढ़ घंटे तक युवराज टॉर्च जलाकर मदद के लिए पुकारते रहे। उनकी आवाज वहां मौजूद लोगों को साफ सुनाई दे रही थी “भाई, किसी तरह बचा लो… पानी बढ़ रहा है…” लेकिन उस अंधेरे और कोहरे में कोई भी तुरंत उनकी मदद नहीं कर पाया।

डिलीवरी एजेंट बना देवदूत, लेकिन पड़ा अकेला

हादसे के समय मौके पर मौजूद डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने इंसानियत की मिसाल पेश की। उसने युवराज की चीखें सुनीं और बिना सोचे-समझे मदद के लिए आगे बढ़ा। मोनिंदर ने बताया कि जब पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं, तब भी कोई पानी में उतरने को तैयार नहीं था। ठंड, बारिश और पानी के नीचे लोहे की रॉड होने की आशंका के चलते रेस्क्यू में देरी होती रही। आखिरकार मोनिंदर ने खुद कमर में रस्सी बांधी, कपड़े उतारे और 30 फुट गहरे पानी में छलांग लगा दी। उसने करीब 50 मीटर तक तैरकर युवराज और कार की तलाश की, लेकिन अंधेरे और गहराई के कारण कुछ भी नजर नहीं आया। करीब आधे घंटे की कोशिश के बाद भी सफलता नहीं मिली।

चार घंटे की देरी और बुझती जिंदगी

पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF की टीमें मौके पर थीं, लेकिन पानी में उतरने से हिचकिचाती रहीं। आखिरकार सुबह करीब 4 बजे गाजियाबाद से NDRF की टीम मौके पर पहुंची। करीब 5 बजे युवराज को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। युवराज की मौत सिर्फ पानी में डूबने से नहीं हुई, बल्कि सिस्टम की देरी से हुई।

अगर समय पर मदद मिलती, तो बेटा जिंदा होता

युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अगर समय पर और सही तरीके से रेस्क्यू किया जाता, तो उनका बेटा बच सकता था। परिवार का आरोप है कि चार घंटे तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

लापरवाही पर एक्शन

मामले ने तूल पकड़ते ही नोएडा प्राधिकरण हरकत में आया। जांच में सामने आया कि बेसमेंट पूरी तरह असुरक्षित था न बैरिकेडिंग, न चेतावनी बोर्ड और न ही रोशनी। प्राधिकरण ने सेक्टर-150 क्षेत्र में तैनात ट्रैफिक सेल के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। इसके अलावा क्षेत्र से जुड़े अन्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मृतक के पिता की शिकायत पर पुलिस ने दो बिल्डरों के खिलाफ FIR दर्ज की है। साथ ही लोटस बिल्डर के आवंटन और निर्माण कार्य की विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की गई है।

पुलिस की सफाई

जॉइंट पुलिस कमिश्नर राजीव नारायण मिश्रा ने कहा कि हादसे के समय विजिबिलिटी शून्य थी और रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच तेजी से जारी है।

क्या यह हादसा था या सिस्टम की हत्या?

यह हादसा कई सवाल छोड़ गया है-

क्या खुले बेसमेंट में बैरिकेडिंग नहीं होनी चाहिए थी?
क्या रेस्क्यू एजेंसियों को इतने घंटे लगने चाहिए थे?
क्या एक डिलीवरी एजेंट का पानी में उतरना सिस्टम की नाकामी नहीं दिखाता?

एक जिंदगी, हजार सवाल

27 साल का युवराज मेहता एक होनहार इंजीनियर था, जिसके सपने, करियर और परिवार सब कुछ एक सिस्टम की लापरवाही ने छीन लिया। आज नोएडा में एक सवाल गूंज रहा है अगर सिस्टम समय पर जाग जाता, तो क्या युवराज आज जिंदा होता? यह हादसा सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि एक चेतावनी है की लापरवाही भी कत्ल होती है।

ये भी पढ़ें: कुल्हाड़ी, आग और बक्सा, झांसी में रिश्तों की सबसे खौफनाक कहानी, जब हवस ने बनाया हैवान!

Shagun Chaurasia

Recent Posts

एक्टर मुश्ताक खान के फैंस से बेटे मोहसिन की अपील, ‘गम नहीं उनकी यादें मनाएं’

Mushtaq Khan Death: बॉलीवुड अभिनेता मुश्ताक खान के निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की…

4 minutes ago

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बाद सीमा खन्ना पर निशाना, वोटर लिस्ट से जुड़ा क्या है विवाद?

Seema Khanna Election Commission: भारतीय चुनाव आयोग में वोटर लिस्ट और डिजिटल सिस्टम को लेकर…

5 minutes ago

हरियाणा के बावल इंडस्ट्रियल एरिया में आग का कहर, सेक्टर-3 की दो कंपनियां राख; घंटों मशक्कत के बाद पाया गया काबू

Bawal Sector 3 Fire News: रेवाड़ी के बावल औद्योगिक क्षेत्र में गुरुवार देर रात अचानक…

28 minutes ago

एशियन गेम्स 2026 में भारत के निशानेबाजों का जलवा, गोल्ड के साथ बनाया नया एशियाई रिकॉर्ड

India 10m Air Pistol Gold Medal: शुक्रवार को एशियाई खेलों में भारत ने शूटिंग के…

1 hour ago

Gold Price Today: फिर सस्ता हुआ सोना, दिल्ली में 24 कैरेट का भाव ₹1,52,820

Gold Price News: सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। 25 सितंबर की…

1 hour ago

दारोगा भर्ती परीक्षा में फिर उठे सवाल, खगौल सेंटर पर समय से पहले खुली प्रश्न पुस्तिकाओं की सील

Bihar Daroga Recruitment Exam: बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग की दारोगा भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी…

2 hours ago