MP में छात्रों ने की आत्महत्या
Student Suicide After Failed In Board Exam: मध्य प्रदेश में बोर्ड परीक्षा के नतीजे सामने आते ही कई दर्दनाक घटनाओं ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। 10वीं और 12वीं के रिजल्ट के बाद अलग-अलग जिलों में छात्रों द्वारा आत्मघाती कदम उठाने की खबरें सामने आई हैं, जिससे परिवारों में मातम और समाज में चिंता का माहौल है।
छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र में रहने वाली 17 वर्षीय छात्रा ने परीक्षा परिणाम आने के बाद फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। वह पिछले कुछ समय से अपने नाना-नानी के घर रह रही थी। परिवार के अनुसार, रिजल्ट से पहले उसका व्यवहार सामान्य था, लेकिन जैसे ही परिणाम आया, वह गहरे सदमे में चली गई। बताया गया है कि छात्रा 10वीं की परीक्षा में तीन विषयों में असफल हो गई थी। इसके बाद उसने खुद को कमरे में बंद किया और यह कदम उठा लिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजते हुए जांच शुरू कर दी।
उज्जैन जिले में भी एक 18 वर्षीय छात्रा ने रिजल्ट देखने के बाद आत्महत्या की कोशिश की। वह अपनी सहेली के साथ एमपी ऑनलाइन सेंटर पर परिणाम देखने गई थी, जहां उसे एक विषय में सप्लीमेंट्री आने की जानकारी मिली। इससे वह मानसिक रूप से बेहद विचलित हो गई। सहेली को घर छोड़ने के बाद वह सीधे मक्सी रोड स्थित पुल पर पहुंची और वहां से छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों की सतर्कता के चलते उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे उसकी जान बच गई।
डॉक्टरों के मुताबिक, छात्रा को गंभीर चोटें आई हैं उसका एक हाथ और एक पैर फ्रैक्चर हुआ है, लेकिन हालत फिलहाल स्थिर है। पुलिस ने बयान दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
मुरैना जिले में भी एक 20 वर्षीय छात्र ने परीक्षा में असफल होने के बाद कथित तौर पर खुद को गोली मार ली। जानकारी के अनुसार, वह 12वीं की परीक्षा में भौतिकी, रसायन शास्त्र और गणित में फेल हो गया था। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया।
मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित परिणामों के अनुसार, इस वर्ष 10वीं का पास प्रतिशत 73.42% और 12वीं का 76.01% रहा। हालांकि आंकड़े सामान्य दिखते हैं, लेकिन इन घटनाओं ने परीक्षा परिणामों के बाद छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को उजागर कर दिया है।
इन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है, क्या हमारा शिक्षा तंत्र और समाज छात्रों के मानसिक दबाव को समझने और संभालने के लिए तैयार है? विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा में असफलता जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक पड़ाव है। ऐसे समय में परिवार और समाज का सहयोग बेहद जरूरी होता है, ताकि कोई छात्र अकेला महसूस न करे।
फिलहाल पुलिस सभी मामलों की जांच में जुटी है, लेकिन इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि रिजल्ट से ज्यादा जरूरी बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य है।
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