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अग्नि-4 की मारक क्षमता से पाकिस्तान पूरा कवर, बीजिंग-शंघाई भी रेंज में, जानें इसकी ताकत

by | Aug 7, 2026 | Explainer, देश

Agni-4 Missile: भारत की अग्नि मिसाइल सीरीज देश की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी श्रृंखला की अग्नि-4 (Agni-IV) एक इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) है। 6 अगस्त 2026 को ओडिशा के चांदीपुर से इसके सफल परीक्षण के बाद इसकी क्षमता एक बार फिर चर्चा में है। परीक्षण नियमित यूजर ट्रायल का हिस्सा था और इसके तकनीकी व ऑपरेशनल पैरामीटर्स सफल रहे।

अग्नि-4 की अधिकतम रेंज करीब 4,000 किलोमीटर बताई जाती है। यह अग्नि-2 और अग्नि-3 के बीच की क्षमता को पूरा करती है, जबकि अग्नि-5 के साथ भारत की लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करती है।

दो चरणों वाला ठोस ईंधन और मोबाइल लॉन्चर

अग्नि-4 दो चरणों वाली ठोस ईंधन प्रणाली पर आधारित है। ठोस ईंधन तकनीक इसे अपेक्षाकृत तेजी से तैयार और तैनात करने में मदद करती है। इसे 8×8 रोड-मोबाइल ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर से दागा जा सकता है और इसमें रेल-मोबाइल क्षमता भी बताई गई है।

मोबाइल प्लेटफॉर्म इसकी सर्वाइवल क्षमता बढ़ाता है, क्योंकि लॉन्च सिस्टम को तेजी से स्थानांतरित किया जा सकता है। मिसाइल में कंपोजिट सामग्री का इस्तेमाल वजन कम करने के लिए किया गया है।

पूरे पाकिस्तान तक पहुंच

करीब 4,000 किमी की रेंज के कारण भारत से लॉन्च होने पर अग्नि-4 पाकिस्तान के लगभग पूरे क्षेत्र को कवर कर सकती है। इस्लामाबाद, लाहौर, रावलपिंडी और कराची जैसे प्रमुख शहर इसकी संभावित पहुंच में आते हैं। भारत की नो-फर्स्ट-यूज नीति के संदर्भ में ऐसी मिसाइलें जवाबी कार्रवाई और विश्वसनीय सेकेंड-स्ट्राइक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

चीन के बड़े हिस्से को कर सकती है कवर

चीन के संदर्भ में अग्नि-4 की तैनाती का स्थान महत्वपूर्ण हो जाता है। पूर्वोत्तर या पूर्वी भारत से लॉन्च करने पर इसकी रेंज चीन के मध्य और पूर्वी हिस्सों तक पहुंच सकती है, जिसमें बीजिंग और शंघाई जैसे प्रमुख केंद्र शामिल हैं। वहीं उत्तरी या पश्चिमी क्षेत्रों से तैनाती होने पर तिब्बत, शिनजियांग और पश्चिमी-मध्य चीन के बड़े हिस्से इसकी संभावित पहुंच में आते हैं। हालांकि वास्तविक कवरेज लॉन्च पॉइंट और उड़ान पथ पर निर्भर करेगी।

अग्नि-4 की प्रमुख तकनीकी खूबियां

अग्नि-4 करीब 20 मीटर लंबी और लगभग 17 टन वजनी है। इसका पेलोड करीब 800-1,000 किलोग्राम बताया जाता है। यह परमाणु या पारंपरिक वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। इसकी गाइडेंस प्रणाली में रिंग लेजर जाइरो आधारित इनर्शियल नेविगेशन, माइक्रो-आईएनएस और डिजिटल कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं। पूर्ण रेंज पर इसकी सटीकता का CEP 100 मीटर से कम बताया गया है। मिसाइल करीब 900 किमी की ऊंचाई तक पहुंच सकती है और इसकी अधिकतम गति लगभग 17,287-18,522 किमी/घंटा बताई जाती है। री-एंट्री के दौरान इसका हीट शील्ड 3,000-4,000 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान सहने के लिए डिजाइन किया गया है।

भारत की रणनीतिक क्षमता में भूमिका

अग्नि-4 को DRDO ने विकसित किया है और इसका निर्माण भारत डायनेमिक्स लिमिटेड से जुड़ा है। उच्च गतिशीलता, ठोस ईंधन, मोबाइल लॉन्च क्षमता, सटीक गाइडेंस और मजबूत री-एंट्री सिस्टम इसकी प्रमुख खूबियां हैं। रणनीतिक बल कमान के तहत इसकी भूमिका भारत की विश्वसनीय सेकेंड-स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करने में है। अग्नि-4, छोटी दूरी की मिसाइलों और लंबी दूरी की अग्नि-5 के बीच रणनीतिक संतुलन प्रदान करती है और भारत की दो-मोर्चे वाली सुरक्षा चुनौती से निपटने की क्षमता को बढ़ाती है।

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