Aja Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु की उपासना के लिए विशेष मानी जाती है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। इस बार अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और दान-पुण्य करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आर्थिक परेशानियों से राहत के लिए भी कुछ विशेष उपाय करने की परंपरा है।
जरूरतमंद को भोजन कराएं और विष्णु पूजा करें
अजा एकादशी के दिन अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि दान-पुण्य से नकारात्मकता दूर होती है और मन को शांति मिलती है। इस दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। यदि संभव हो तो ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करना शुभ माना जाता है। भगवान के सामने दीपक जलाकर उनका ध्यान करें और श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें। पूजा के दौरान पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करने की भी परंपरा है।
तुलसी, पान के पत्ते और पीपल से जुड़े उपाय
अजा एकादशी पर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार विष्णु मंत्र का जाप कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इससे मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। घर में तनाव या वैवाहिक जीवन में परेशानी चल रही हो, तो इस दिन तुलसी माता की पूजा करने की परंपरा है। तुलसी के सामने दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक पूजा करें। मान्यता है कि तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय हैं। धन-समृद्धि के लिए एक अन्य उपाय के तौर पर साफ पान के पत्ते पर ‘ॐ विष्णवे नमः’ लिखकर भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करने की मान्यता है। अगले दिन इसे पीले कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने की परंपरा बताई जाती है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इससे घर में धन-धान्य की वृद्धि हो सकती है।
शाम को पीपल के नीचे दीपक जलाएं
अजा एकादशी की शाम पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाकर परिक्रमा करने की भी धार्मिक मान्यता है। कहा जाता है कि इससे भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो सकती है। इसके अलावा, इस दिन श्रीमद्भागवत कथा या भगवान विष्णु से जुड़े धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना भी पुण्यदायक माना जाता है। अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार पाठ कर सकते हैं या भगवान के नाम का स्मरण कर सकते हैं।
अजा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा, दान-पुण्य और धार्मिक उपाय करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए इन कार्यों से सुख-समृद्धि आती है। हालांकि, धन संबंधी परेशानियों से राहत के लिए पूजा-पाठ के साथ सही आर्थिक योजना और मेहनत भी जरूरी है।
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