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खामेनेई के अंतिम संस्कार में कौन-कौन से नेता पहुंचे, लाल झंडे का क्या है मतलब और क्यों खास है यह समारोह?

Ali Khamenei's Funeral: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई का अंतिम संस्कार 9 जुलाई को पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस मौके पर लाखों लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी, जबकि कई देशों के शीर्ष नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। सात दिनों तक चलने वाले राजकीय शोक समारोह में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। अंतिम संस्कार में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति और वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधि शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। कई तस्वीरों और वीडियो में उनके ताबूत पर रखा लाल झंडा भी चर्चा का विषय बना, जिसे शिया परंपरा में विशेष महत्व दिया जाता है।

किन-किन देशों के नेता अंतिम संस्कार में पहुंचे?

अंतिम संस्कार में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान और जॉर्जिया के राष्ट्रपति मिखाइल कावेलाशविली शामिल होंगे। वहीं, तुर्किये के उपराष्ट्रपति जेवदेत यिलमाज़, भारत की ओर से राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा, चीन की संसद की स्थायी समिति के उपाध्यक्ष हे वेई, रूस के सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष एवं पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव, अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी और उपप्रधानमंत्री अब्दुल गनी बरादर, तथा बांग्लादेश के संसद अध्यक्ष हाफिजुद्दीन अहमद भी समारोह में शामिल होंगे।

ताबूत पर रखे लाल झंडे का क्या है मतलब?

अंतिम संस्कार के दौरान खामेनेई के ताबूत पर रखा लाल झंडा लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा था। शिया परंपरा में लाल झंडा केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष और शहादत का प्रतीक माना जाता है।

इसका संबंध विशेष रूप से इमाम हुसैन और कर्बला की घटना से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि लाल झंडा इस बात का संकेत है कि शहीद के खून का इंसाफ अभी बाकी है। ईरान में यह झंडा कई बार राष्ट्रीय संकट, शहादत या प्रतिरोध के संदेश के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।

किन दो देशों से गुजरा अंतिम संस्कार जुलूस?

अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले उनके पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि के लिए विभिन्न स्थानों पर ले जाया गया। अंतिम यात्रा से जुड़े कार्यक्रमों में ईरान के प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक केंद्र शामिल रहे। इसके अलावा शोक सभाओं और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में पड़ोसी देशों के धार्मिक प्रतिनिधियों और समर्थकों की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली।

खामेनेई का प्रभाव

अयातुल्लाह अली खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता रहे और उन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक देश की विदेश नीति, रक्षा रणनीति और धार्मिक नेतृत्व को दिशा दी। उनके निधन के साथ ईरान की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि ईरान का अगला सर्वोच्च नेता कौन होगा और क्षेत्रीय राजनीति पर इसका क्या असर पड़ेगा।

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Tanisha Verma

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