Iran earthquake: दक्षिणी ईरान के गेराश इलाके में 4.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिससे पहले से तनावपूर्ण माहौल और अस्थिर हो गया। यह झटका ऐसे समय आया है जब देश के कई हिस्सों में अमेरिकी और इजरायली हवाई हमले जारी हैं। फिलहाल भूकंप से किसी बड़े नुकसान या जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।
भूकंप के साथ-साथ सैन्य मोर्चे पर भी हालात गंभीर बने हुए हैं। तेहरान से लगभग 800 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित करमान हवाई अड्डे पर हुए हवाई हमले में कम से कम 13 ईरानी सैनिकों के मारे जाने की खबर है। अर्धसरकारी तसनीम समाचार एजेंसी और हमशहरी दैनिक के अनुसार, इस हमले में उस सैन्य अड्डे को निशाना बनाया गया जहां हेलीकॉप्टर तैनात थे। हमले के बाद क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और बचाव दलों को सक्रिय किया गया है।
शनिवार से इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर हवाई हमलों की तीव्रता बढ़ी है। इन हमलों का लक्ष्य मुख्य रूप से सैन्य प्रतिष्ठान और रणनीतिक ढांचे बताए जा रहे हैं। लगातार हो रही बमबारी ने कई शहरों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है और नागरिकों में असुरक्षा की भावना गहरी हुई है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन ने सोमवार को कहा कि ईरान के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान कुछ समय तक जारी रह सकता है, लेकिन यह वर्षों तक नहीं चलेगा। उन्होंने संकेत दिया कि कार्रवाई का उद्देश्य विशेष रणनीतिक लक्ष्यों को साधना है, न कि किसी दीर्घकालिक कब्जे की योजना। उनके बयान से यह स्पष्ट हुआ कि इजरायल इस अभियान को सीमित दायरे में रखकर अपने सुरक्षा हितों को साधना चाहता है।
इजरायली सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नादव शोशानी ने पत्रकारों को बताया कि सेना ने कई हफ्तों तक चल सकने वाले अभियान की तैयारी कर ली है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल जमीनी बलों की तैनाती की संभावना नहीं दिख रही। उनके अनुसार, मौजूदा रणनीति हवाई हमलों और विशिष्ट सैन्य लक्ष्यों तक सीमित है। इससे संकेत मिलता है कि इजरायल व्यापक जमीनी युद्ध से बचना चाहता है।
एक ओर भूकंप जैसे प्राकृतिक झटके, और दूसरी ओर लगातार हो रहे हवाई हमले इन दोनों ने मिलकर ईरान पर दबाव बढ़ा दिया है। भूकंप भले ही मध्यम तीव्रता का था, लेकिन संवेदनशील बुनियादी ढांचे पर इसका असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। ऐसे समय में जब देश पहले ही सैन्य हमलों से जूझ रहा हो, प्राकृतिक आपदा स्थिति को और जटिल बना सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि हवाई हमलों का सिलसिला जारी रहा तो पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ सकती है। क्षेत्र पहले ही कई मोर्चों पर तनाव झेल रहा है। ऐसे में किसी भी अप्रत्याशित घटना चाहे वह सैन्य हो या प्राकृतिक से व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर ईरान और उसके आसपास के हालात पर टिकी हुई है, क्योंकि यह घटनाक्रम पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
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