खेल

मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर मनाया जा रहा राष्ट्रीय खेल दिवस

National Sports Day 2025 : आज देशभर में राष्ट्रीय खेल दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। हर साल 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन भारत के महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद का जन्म हुआ था।

मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ कहा

मेजर ध्यानचंद को हॉकी के क्षेत्र में उनके असाधारण कौशल के कारण ‘हॉकी का जादूगर’ कहा जाता है। उनके दोस्त उन्हें प्यार से ‘चंद’ बुलाते थे, क्योंकि वह अक्सर ड्यूटी के बाद चांदनी रात में घंटों हॉकी का अभ्यास किया करते थे। उनके करियर की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने खेल जीवन में 1000 से अधिक गोल दागे और भारत को 1928 एम्सटर्डम, 1932 लॉस एंजिल्स और 1936 बर्लिन ओलंपिक में लगातार तीन गोल्ड मेडल दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

सेना में शुरुआत और पद्मभूषण सम्मान

ध्यानचंद ने मात्र 16 वर्ष की आयु में ब्रिटिश भारतीय सेना में भर्ती होकर खेल में कदम रखा। उनके पिता समेश्वर सिंह भी ब्रिटिश सेना में थे। सेना में रहते हुए उन्होंने हॉकी खेलना (National Sports Day 2025) शुरू किया और 1922 से 1926 के बीच कई रेजिमेंटल खेलों और टूर्नामेंट में हिस्सा लिया।

1928 में जब हॉकी को पहली बार ओलंपिक में शामिल किया गया, ध्यानचंद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 14 गोल किए और भारत को पहला ओलंपिक गोल्ड दिलाया। उनके योगदान को देखते हुए उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।

जर्मनी के हिटलर ने उन्हें सेना में शामिल होने का प्रस्ताव दिया

हॉकी का जादू और हिटलर का प्रस्ताव ठुकराया

मेजर ध्यानचंद की बेजोड़ हॉकी तकनीक और गेंद पर नियंत्रण ने उन्हें असाधारण बना दिया। 1936 बर्लिन ओलंपिक में उनका खेल देखकर जर्मनी के तानाशाह हिटलर ने उन्हें जर्मन सेना में शामिल होने का प्रस्ताव दिया, जिसे उन्होंने देशभक्ति के कारण ठुकरा दिया।

जादुई स्टिक और आत्मकथा

ध्यानचंद की हॉकी स्टिक इतनी कुशलता से खेलती थी कि नीदरलैंड के अधिकारियों ने संदेह किया कि इसमें चुंबक या कोई अन्य सामग्री लगी है। स्टिक की जांच भी की गई, लेकिन उनकी खेल-कौशल केवल अभ्यास और लगन का नतीजा था। उनकी आत्मकथा ‘गोल’ 1952 में प्रकाशित हुई, जिसमें उन्होंने अपने अनुभव और खेल जीवन का विस्तार से उल्लेख किया।

विश्व के महान खिलाड़ियों की प्रशंसा

क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी डॉन ब्रैडमैन ने ध्यानचंद के खेल की सराहना करते हुए कहा था कि उनका गोल करना बिल्कुल वैसे ही होता था जैसे क्रिकेट में रन बनते हैं।

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राष्ट्रीय खेल दिवस पर मेजर ध्यानचंद की इस विरासत को याद कर देशभर में खिलाड़ियों और युवाओं को प्रेरित किया जाता है। उनका समर्पण, खेल भावना और देशभक्ति आज भी खेल जगत और समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

Shweta Gupta

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