स्वास्थ्य समाचार

दिल्ली की जहरीली सर्दी में छिपा एक और खतरा हवा में फैल रहा सुपरबग, इलाज भी हो सकता है बेअसर!

Antibiotic Resistant Bacteria In Air: दिल्ली की सर्दियों में बढ़ता प्रदूषण हर साल आंखों में जलन, सांस की तकलीफ और खांसी जैसी समस्याएं लेकर आता है, लेकिन अब एक नया और कहीं ज्यादा खतरनाक खतरा सामने आया है। राजधानी की जहरीली हवा में ऐसे सुपरबग पाए गए हैं, जिन पर आम एंटीबायोटिक दवाएं भी असर नहीं करतीं। यह खुलासा दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के एक ताजा वैज्ञानिक अध्ययन में हुआ है।

क्या हुआ है रिपोर्ट में खुलासा

यह शोध Nature Scientific Reports नामक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दिल्ली के कई शहरी इलाकों से हवा के नमूने इकट्ठा किए। इनमें भीड़भाड़ वाले बाजार, झुग्गी-बस्तियां, रिहायशी अपार्टमेंट, और JNU परिसर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट शामिल थे। गर्मी, मानसून और सर्दी तीनों मौसमों में घर के अंदर और बाहर की हवा की जांच की गई।

शोध के नतीजे चौंकाने वाले हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि सर्दियों में हवा में मौजूद बैक्टीरिया की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की तय सीमा से कई गुना अधिक थी। कुछ इलाकों में यह स्तर 16,000 CFU प्रति घन मीटर तक पहुंच गया, जो सुरक्षित सीमा से लगभग 16 गुना ज्यादा है।

हवा में कई बैक्टीरिया

सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि हवा में पाए गए कई बैक्टीरिया स्टैफाइलोकोकस समूह के थे, जो त्वचा संक्रमण, निमोनिया, रक्त संक्रमण और अस्पतालों में फैलने वाली गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इनमें से बड़ी संख्या में मेथिसिलिन रेजिस्टेंट स्टैफाइलोकोकस (MRS) पाए गए, यानी ऐसे बैक्टीरिया जिन पर आम एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर हो जाती हैं।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि करीब 73 प्रतिशत बैक्टीरिया मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (MDR) थे। इनमें मैक्रोलाइड्स, बीटा-लैक्टम, जेंटामाइसिन और ट्राइमेथोप्रिम जैसी दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध पाया गया। जेनेटिक जांच में mecA जीन की पुष्टि हुई, जो कई शक्तिशाली एंटीबायोटिक दवाओं को निष्क्रिय कर देता है।

खामोश जानलेवा खतरा

वैज्ञानिकों के अनुसार, सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ ऐसे खतरनाक बैक्टीरिया भी हवा में ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। मानसून के दौरान बारिश से इनका स्तर कुछ हद तक कम हो जाता है। शोधकर्ताओं (Researchers) ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को बढ़ावा दे सकती है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य खतरों में गिना जाता है।

शोधकर्ताओं ने सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों से अपील की है कि शहरी वातावरण में AMR की नियमित निगरानी की जाए और इससे निपटने के लिए ठोस नीति बनाई जाए। यह अध्ययन साफ संकेत देता है कि दिल्ली की सर्दियों की हवा अब सिर्फ सांस की बीमारी नहीं, बल्कि एक खामोश जानलेवा खतरा भी बन चुकी है।

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Shagun Chaurasia

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