Anti Paper Leak Bill 2026: NEET-UG पेपर लीक को लेकर Cockroach Janta Party (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र-युवा आंदोलन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ दिन बाद मंगलवार को लोकसभा में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। सरकार ने इसे पेपर लीक से जुड़े अपराधों में सजा और कार्रवाई को सख्त करने वाले सुधारों में शामिल किया है।
सजा और जुर्माना बढ़ाने का प्रस्ताव
सोमवार को पेश बिल को विचार के लिए रखते हुए PMO में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसे छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के सरकार के संकल्प की पुष्टि बताया। 2024 का मूल कानून फरवरी में संसद से पारित होकर जून में लागू हुआ था। इसमें पेपर और आंसर-की लीक करने से लेकर फर्जी परीक्षा वेबसाइट चलाने तक 15 अपराध तय किए गए थे। सभी अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य हैं। उम्मीदवारों को कानून के दायरे से बाहर रखा गया है और संशोधन में यह स्थिति नहीं बदली गई।
2026 के बिल में अनुचित साधनों के दोषी व्यक्ति की न्यूनतम सजा 3 से बढ़ाकर 5 साल और अधिकतम 5 से 10 साल करने का प्रस्ताव है। जुर्माने की सीमा ₹10 लाख से ₹50 लाख होगी। सर्विस प्रोवाइडर पर जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ और सार्वजनिक परीक्षाओं से प्रतिबंध 4 से बढ़ाकर 8 साल किया जाएगा। संगठित अपराध में न्यूनतम सजा 5 से 7 साल और जुर्माना ₹10 करोड़ प्रस्तावित है।
जांच और ट्रायल की समयसीमा
बिल की नई धाराएं 12A और 12B केंद्र सरकार द्वारा मामला सौंपे जाने के बाद जांच को 2 महीने में पूरा करने की समयसीमा तय करती हैं। जांच केंद्रीय एजेंसी या नई प्रस्तावित स्पेशल टास्क फोर्स कर सकती है।
हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में हाईकोर्ट से परामर्श के बाद सेशन कोर्ट को विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाया जाएगा। रोजाना सुनवाई होगी और चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने में ट्रायल पूरा करना होगा। अपील हाईकोर्ट में होगी, जहां दो जजों की बेंच इसे दाखिल होने के 3 महीने में निपटाने का प्रयास करेगी। सरकार के अनुसार, बदलावों का उद्देश्य तेज ट्रायल और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना है।

