उत्तर प्रदेश

44 साल की उम्र में लिखी नई कहानी, बागपत की बबीता राणा बनीं महिलाओं की प्रेरणा

Bagpat News : अगर हौसला बुलंद हो तो उम्र और परिस्थितियां कभी बाधा नहीं सकती। इसका जीता-जागता उदाहरण हैं बागपत जिले की कंडेरा गांव की रहने वाली बबीता राणा, जिन्होंने शादी, बच्चों और घरेलू जिम्मेदारियों के बावजूद अपने सपनों को जिंदा रखा और आखिरकार 44 वर्ष की आयु में बड़ी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की परीक्षा पास कर मुख्य सेविका (Child Development Project Supervisor) पद प्राप्त किया है।

शादी के बाद रुकी पढ़ाई

बबीता का विवाह वर्ष 2002 में बड़ौत निवासी प्रदीप राणा से हुआ था, जो भारतीय वायुसेना (Airforce) में मेडिकल असिस्टेंट के पद पर तैनात थे। शादी के बाद बबीता को पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इस दौरान वह अपने पति के साथ बेंगलुरु गई, जहां उन्होंने बीएड (B.Ed.) की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2004 और 2005 में दोनों बेटों आर्यन और आदित्य के जन्म के बाद उन्होंने पूरी तरह से घर-परिवार की जिम्मेदारी संभाल ली और पढ़ाई बीच में ही छूट गई।

बच्चों से मिली प्रेरणा

गृहणी बनने के बाद बबीता ने पूरा ध्यान अपने बेटों की पढ़ाई पर लगाया। लेकिन बच्चों को पढ़ाते-पढ़ाते उनके मन में फिर से पढ़ाई करने और करियर बनाने का जज़्बा जाग उठा। जब बड़ा बेटा 10वीं कक्षा में था, उसी दौरान वर्ष 2017 में बबीता ने दोबारा पढ़ाई शुरू की।

उन्होंने 2018 और 2019 में यूपी-टेट और TGT जैसी परीक्षाएं दीं, मगर सफलता नहीं मिली। बार-बार की असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार ने भी इस दौरान उनका हौसला बढ़ाया।

पति के रिटायरमेंट के बाद लिया बड़ा निर्णय

प्रदीप राणा एयरफोर्स से सेवानिवृत्त होने के बाद उत्तराखंड के काशीपुर में सूर्य रोशनी कंपनी में हेड ऑफ सिक्योरिटी के पद पर कार्यरत हैं। पति के रिटायर होने के बाद बबीता ने ठान लिया कि अब वह अपने करियर का सपना पूरा करेंगी। 2022 में उन्होंने बाल सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में मुख्य सेविका पद के लिए आवेदन किया और लगातार मेहनत जारी रखी।

मेहनत का मिला फल

कई सालों तक कठिन परिश्रम करने के बाद आखिरकार सफलता ने बबीता का दरवाजा खटखटाया। परिणाम घोषित होने पर परिवार और रिश्तेदारों ने उन्हें ढेरों शुभकामनाएं दीं। उनके बेटे वर्तमान में BSC ऑनर्स की पढ़ाई कर रहे हैं और मां की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं।

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महिलाओं के लिए बनीं मिसाल

आज बबीता राणा (Bagpat ) उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो शादी और बच्चों के बाद अपने सपनों को अधूरा मान बैठती हैं। उन्होंने साबित किया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और सही समय पर लिया गया निर्णय किसी भी मंज़िल तक पहुंचा सकता है।

Shweta Gupta

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