Baljek Airport Meghalaya: दिल्ली, मुंबई या चेन्नई जैसे व्यस्त हवाई अड्डों के विपरीत, मेघालय के बलजेक एयरपोर्ट का रिकॉर्ड बेहद अलग है। पश्चिम गारो हिल्स में स्थित इस छोटे एयरपोर्ट पर पिछले 18 वर्षों में केवल दो विमान ही उतरे हैं। 2008 में शुरू हुआ यह एयरपोर्ट अब तक नियमित यात्री उड़ानों का इंतजार कर रहा है।
12.52 करोड़ की लागत से हुआ निर्माण
बलजेक एयरपोर्ट को बनाने का विचार 1983 में सामने आया था, जबकि सरकार से इसकी मंजूरी 1995 में मिली। करीब 12.52 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस एयरपोर्ट का उद्घाटन 23 अक्टूबर 2008 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने किया था। इसे खासतौर पर 20 सीटों वाले डोर्नियर-228 विमान के संचालन के लिए विकसित किया गया था। एयरपोर्ट में 1.1 किलोमीटर लंबा रनवे और STOL (Short Take-Off and Landing) सुविधा उपलब्ध है।
उद्घाटन के दिन ही उतरे थे दोनों विमान
उद्घाटन समारोह के दौरान गुवाहाटी से एक चार सीटों वाला सेसना विमान और एक नौ सीटों वाला डोर्नियर विमान यहां उतरा था। यही अब तक इस एयरपोर्ट पर उतरने वाले एकमात्र दो विमान हैं। इसके बाद यहां कभी भी नियमित कमर्शियल फ्लाइट सेवा शुरू नहीं हो सकी।
रनवे विस्तार की योजना भी अधूरी
छोटे रनवे के कारण बड़े विमानों का संचालन संभव नहीं हो पाया। ATR-42 और ATR-72 जैसे विमानों के लिए रनवे बढ़ाने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए 2014 में 58 एकड़ अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद नियमित यात्री सेवाएं अब तक शुरू नहीं हो सकीं।
अब कार्यक्रमों का बन गया केंद्र
आज बलजेक एयरपोर्ट हवाई यात्रियों से ज्यादा म्यूजिक कॉन्सर्ट और सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए जाना जाता है। हालांकि, मेघालय सरकार भारतीय विमानन प्राधिकरण के साथ मिलकर इस एयरपोर्ट को दोबारा सक्रिय करने की दिशा में काम कर रही है।
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