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क्या टूट जाएगा 35 साल का रिकॉर्ड? बांकीपुर में प्रशांत किशोर की मजबूत दस्तक

Bankipur Election Prashant Kishor: बिहार की राजनीति में बांकीपुर उपचुनाव इस समय सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक बन गया है। शुरुआती रुझानों में जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर (PK) को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। यदि यही रुझान अंतिम नतीजों में बदलते हैं, तो बांकीपुर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का करीब 35 वर्षों से चला आ रहा राजनीतिक वर्चस्व समाप्त हो सकता है। बांकीपुर को लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। यही कारण है कि इस उपचुनाव को केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

दो महीने पहले से मैदान में उतर गए थे प्रशांत किशोर

इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि प्रशांत किशोर ने अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी पहले चुनावी तैयारी शुरू कर दी थी। बताया जा रहा है कि उन्होंने भाजपा और राजद समेत अन्य दलों से लगभग दो महीने पहले ही क्षेत्र में सक्रिय प्रचार अभियान शुरू कर दिया था। इस दौरान उन्होंने लगातार जनसभाएं, नुक्कड़ बैठकें और घर-घर संपर्क अभियान चलाया। स्थानीय मुद्दों, रोजगार, शिक्षा और शहरी सुविधाओं को उन्होंने अपने प्रचार का प्रमुख आधार बनाया।

चुनाव को सरकार पर जनमत संग्रह बताया

चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने बार-बार इस उपचुनाव को "सम्राट चौधरी सरकार पर जनादेश" बताया। उनका कहना था कि जनता इस चुनाव के जरिए राज्य सरकार के कामकाज पर अपनी राय व्यक्त करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस रणनीति ने चुनाव को स्थानीय मुद्दों से आगे बढ़ाकर व्यापक राजनीतिक बहस का विषय बना दिया, जिसका असर मतदाताओं पर भी दिखाई दे रहा है।

बिहार की राजनीति के लिए क्यों अहम है यह सीट

बांकीपुर की सीट पर संभावित बदलाव सिर्फ एक चुनावी जीत या हार नहीं होगी। यदि प्रशांत किशोर यहां जीत दर्ज करते हैं, तो यह जन सुराज के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जाएगी। साथ ही बिहार की राजनीति में तीसरे विकल्प की संभावनाओं को भी नई ताकत मिल सकती है। वहीं भाजपा के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल रही है। ऐसे में अंतिम नतीजे राज्य की आगामी राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।

बांकीपुर उपचुनाव के रुझानों ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि अंतिम फैसला मतगणना पूरी होने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल प्रशांत किशोर की बढ़त ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं और पारंपरिक राजनीतिक गढ़ अब पहले जैसे अभेद्य नहीं रहे।

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Lavanya Dayal

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