Bengaluru Footpath Encroachment Drive: बेंगलुरु में फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने का अभियान चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग इसे पैदल यात्रियों के लिए राहत मान रहे हैं, जबकि कई लोग रेहड़ी-पटरी वालों की आजीविका को लेकर चिंता जता रहे हैं।
सरकार का दावा और आगे की योजना
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बताया कि 'सेफ फुटपाथ कैंपेन' के तहत पिछले तीन दिनों में शहर के पांचों नगर निगम क्षेत्रों की मुख्य और उप-मार्गों से 200 किमी से अधिक फुटपाथ खाली कराए गए हैं। ग्रेटर बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा कि फुटपाथों की मरम्मत पर 70 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेहड़ी-पटरी वालों को हटाया नहीं जा रहा, बल्कि मुख्य सड़कों से वार्ड सड़कों पर स्थानांतरित किया जाएगा। अभियान के अगले चरण में लावारिस वाहन, अवैध पार्किंग, निर्माण मलबा, कूड़े के हॉटस्पॉट और फुटपाथों पर बने रैंप भी हटाए जाएंगे। सरकार के मुताबिक यह कदम जनता की मांग और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया है।
समर्थन और विरोध दोनों
पूर्व पुलिस आयुक्त भास्कर राव ने अभियान की सराहना करते हुए विक्रेताओं के लिए अलग हॉकर जोन बनाने की सलाह दी। कई लोगों ने इसे अन्य शहरों में भी लागू करने और नियमित रूप से जारी रखने की मांग की। रेडिट यूजर्स ने मैसूर बैंक सर्कल और केजी रोड जैसे इलाकों में साफ और बाधा-मुक्त फुटपाथों की भी सराहना की।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि सरकार गड्ढों, जलनिकासी, कचरा प्रबंधन, पानी की कमी और फुटपाथों की कमी जैसे बड़े मुद्दों की अनदेखी कर रही है। सामाजिक कार्यकर्ता श्रीनिवास अलावल्ली ने अभियान को संतुलित बनाने, कानूनी हॉकर जोन तय करने और विक्रेता संगठनों व आरडब्ल्यूए के साथ सहमति बनाने की सलाह दी। उनका कहना है कि सड़क विक्रेता भी शहर की जरूरत हैं और उनका पुनर्वास जरूरी है।
विपक्ष ने क्या कहा?
भाजपा सांसद पीसी मोहन ने कहा कि अभियान की सफलता हटाए गए किलोमीटर से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि आने वाले महीनों और वर्षों तक कितने फुटपाथ वास्तव में पैदल चलने योग्य बने रहते हैं। उन्होंने दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए स्थायी निगरानी व्यवस्था की मांग की।
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