Bijnor Sugar Mill: उत्तर प्रदेश के बिजनौर-झालू मार्ग पर सड़क किनारे पड़ी गर्म राख में झुलसने से घायल हुए चार बच्चों में से 13 वर्षीय साद की मंगलवार रात इलाज के दौरान मौत हो गई। करीब डेढ़ महीने से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे साद के निधन के बाद परिवारों में भारी आक्रोश है और वे दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कैसे हुआ हादसा?
यह घटना 1 मई को शहर कोतवाली क्षेत्र के झालू रोड स्थित एक आम के बाग के पास हुई थी। आंधी-तूफान के बाद बच्चे बाग में गिरे आम बीनने पहुंचे थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, रखवाले द्वारा भगाए जाने पर बच्चे सड़क किनारे पड़े राख के ढेर की ओर भागे। राख ऊपर से ठंडी दिख रही थी, लेकिन अंदर बेहद गर्म थी। जैसे ही बच्चे उस पर पहुंचे, उनके पैर धंस गए और वे गंभीर रूप से झुलस गए। किसानों ने उन्हें बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां से उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया।
इस हादसे में साद, उजैद, साहिल और इशान घायल हुए थे। अब साद की मौत के बाद परिजनों ने आरोप लगाया है कि सड़क किनारे खतरनाक गर्म राख डालने की लापरवाही ने यह हादसा कराया।
जांच और कार्रवाई
घटना के बाद एसडीएम सदर रितु रानी के नेतृत्व में जांच शुरू की गई। टीम ने मौके से राख के नमूने लिए और बिजनौर शुगर मिल समेत संबंधित पक्षों से पूछताछ की। प्रशासन ने कहा है कि जांच में लापरवाही साबित होने पर जिम्मेदार व्यक्ति, संस्था या फैक्ट्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बाग मालिक और संबंधित शुगर मिल को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
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