BrahMos Missile Global Demand: ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के सफल इस्तेमाल के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के CEO डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी ने इंडिया टुडे को दिए विशेष इंटरव्यू में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि फिलीपींस ब्रह्मोस का पहला विदेशी ग्राहक बना, जिसके बाद वियतनाम और इंडोनेशिया भी इससे जुड़े।
ऑपरेशन सिंदूर में पहली बार हुआ युद्ध में इस्तेमाल
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पहली बार ब्रह्मोस मिसाइल का युद्ध में इस्तेमाल किया। जवाबी और एहतियाती कार्रवाई के तहत पाकिस्तान के एयरबेस और प्रमुख सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए गए, जिनसे भारी नुकसान होने की बात कही गई।
भारतीय वायुसेना ने सुखोई-30MKI लड़ाकू विमानों से ब्रह्मोस मिसाइलें दागीं। जोशी के मुताबिक, मिसाइल ने दुश्मन के रडार से बचते हुए सटीक निशाने लगाए। उन्होंने इसे ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया की सबसे घातक मिसाइल बताया।
तीनों सेनाओं के पास थी ब्रह्मोस
जोशी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पहली बार थलसेना, नौसेना और वायुसेना तीनों ब्रह्मोस से लैस थीं। नेटवर्क-सेंट्रिक तकनीक वाली यह मिसाइल जमीन, युद्धपोत और लड़ाकू विमान से लॉन्च की जा सकती है।
पिछले साल अक्टूबर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में निर्मित ब्रह्मोस की पहली खेप रवाना की थी। उन्होंने पाकिस्तान के हर हिस्से को इसकी मारक क्षमता के दायरे में बताते हुए ऑपरेशन सिंदूर को 'सिर्फ ट्रेलर' कहा था।
नई ब्रह्मोस की रेंज बढ़ाने पर काम
ब्रह्मोस एयरोस्पेस मिसाइल को पूरी तरह स्वदेशी बनाने, इसकी मारक क्षमता बढ़ाने और सुखोई विमानों पर अगली पीढ़ी का संस्करण तैनात करने पर काम कर रही है। मिसाइल पहले नौसेना, फिर थलसेना और बाद में सुखोई विमानों के लिए विकसित हुई थी।
जोशी के अनुसार, पिलानी, नागपुर और लखनऊ में तीन उत्पादन केंद्र हैं, जिन्हें 300 से अधिक MSME सहयोग देते हैं। कंपनी तीनों सेनाओं की जरूरतें पूरी करने में सक्षम है। उन्होंने बताया कि भारत रूस के साथ अंतर-सरकारी समझौते के तहत उसकी सेना को भी ब्रह्मोस मिसाइलें देने के लिए तैयार है। इस संबंध में बातचीत जारी है।
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