breastfeeding after C-section: सी-सेक्शन से बच्चे के जन्म का तरीका बदलता है, लेकिन इससे स्तनपान की क्षमता प्रभावित नहीं होती। मणिपाल हॉस्पिटल्स, विजयवाड़ा की कंसल्टेंट पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटोलॉजी डॉ. श्रीमुखी अनूमोलु के अनुसार, शुरुआती चुनौती अक्सर स्तनपान से ज्यादा सर्जरी से उबरने की होती है। इमरजेंसी सी-सेक्शन, लंबे समय तक लेबर या अधिक ब्लड लॉस के बाद परिपक्व दूध बनने में थोड़ी देरी हो सकती है। अगर मां और बच्चा स्थिर हों तो जन्म के पहले घंटे में स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट और ब्रेस्टफीडिंग शुरू करना दूध बनने और बच्चे को सही तरह लैच करने में मदद कर सकता है।
शुरुआती 24-48 घंटे में क्या करें?
इस दौरान बच्चे को कोलोस्ट्रम मिलता है, जो कम मात्रा में बनने वाला गाढ़ा शुरुआती दूध है। पहले दिन बच्चे का पेट लगभग चेरी जितना छोटा होता है, इसलिए यह मात्रा आमतौर पर पर्याप्त होती है। सर्जरी के दर्द में फीडिंग मुश्किल लग सकती है। फुटबॉल होल्ड, करवट लेकर फीडिंग और तकियों का सहारा लेने से चीरे पर दबाव कम किया जा सकता है। नर्स या लैक्टेशन कंसल्टेंट सही पोजीशन चुनने में मदद कर सकते हैं। सी-सेक्शन के बाद दी जाने वाली आम दर्द निवारक दवाएं सामान्यतः ब्रेस्टफीडिंग के अनुकूल होती हैं।
पहले हफ्ते में किन बातों का ध्यान रखें?
सी-सेक्शन से जन्मे बच्चे पहले दिन अधिक सो सकते हैं। मां को 24 घंटे में 8-12 बार स्तनपान कराने का लक्ष्य रखना चाहिए। बार-बार फीडिंग दूध बनने को बढ़ावा देती है। बच्चा लैच न कर पाए या मेडिकल कारणों से अलग हो, तो शुरुआती घंटों में हाथ से या पंप से दूध निकालना सप्लाई बनाए रखने में मदद कर सकता है। निप्पल में तेज दर्द, लगातार लैच की समस्या, वजन न बढ़ना या अपेक्षा से कम गीले डायपर दिखें तो तुरंत विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए। सही दर्द नियंत्रण, आरामदायक पोजीशन और समय पर सहायता से अधिकांश माताएं सफलतापूर्वक ब्रेस्टफीडिंग शुरू कर सकती हैं।
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